मशहूर कवि और गीतकार पद्मभूषण गोपालदास नीरज का निधन, ऐ भाई ज़रा देख के चलो था सबसे मशहूर गीत
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मशहूर कवि और गीतकार गोपालदास नीरज का दिल्ली के एम्स अस्पताल में, 93 साल की उम्र में निधन हो गया। गोपालदास सक्सेना, इटावा के रहने वाले थे और हिंदी फिल्मों के लिए नीरज नाम से गाने लिखते थे। उनका निधन, एम्स में बुधवार की शाम सात बजकर 35 मिनट पर हुआ। उन्हें उपचार के लिए वहां भरती कराया गया था।
बीबीसी को उनके पुत्र शशांक प्रभाकर ने बताया कि लाख कोशिशों को बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके पार्थिव शरीर को पहले आगरा में दर्शनार्थ रखा जाएगा और उसके बाद अलीगढ़ में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनके जाने से हिंदी साहित्य जगत शोक में आ चुका है।

नीरज को अपने हिंदी गीतों के लिए भी काफी याद किया जाएगा। ए भाई ज़रा देख के चलो उनका सबसे मशहूर गीत है। मेरा नाम जोकर का ये गाना जब नीरज ने राज कपूर को सुनाया तो वो खुशी से उछल पड़े थे। ये गाना फ्रीवर्स शैली का था जिसकी धुन बनाने से शंकर - जयकिशन ने मना कर दिया।
बाद में जिस धुन में नीरज ने इस गाने को गुनगुनाया था, उसी धुन में ये गाना बनाया गया और आज तक बॉलीवुड के सबसे मशहूर गानों में शुमार है। इसके अलावा नीरज ने लिखे जो खत तुझे, कारवां गुज़र गया जैसे गीतों की रचना की जो लोगों को बेहद पसंद आए थे। उन्हें तीन बार फिल्मफेयर पुरस्कार से नवाज़ा गया था।
हालांकि फिल्मों में उनका सफर केवल पांच सालों का रहा। लेकिन इस दौरान उन्होंने कई खूबसूरत गीतों की रचना की जिनमें शोखियों में घोला जाए, दिल आज शायर है - ग़म आज नग़मा, रंगीला रे तेरे रंग में रंगा है मेरा मन, आदमी हूं आदमी से प्यार करता हूं जैसे गीत शामिल हैं।
नीरज को 2007 में भारत सरकार ने पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया था।


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