'पीपली लाइव' ऑस्कर के लिए नामांकित

फिल्म की कहानी सूखे की वजह से कर्ज़ में डूबे ग़रीब किसानों पर केन्द्रित है.फिल्म में किसानों की इस दुर्दशा पर राजनेताओं, नौकरशाहों और मीडिया की असंवेदनशीलता को दर्शाया गया है.फिल्म का चुनाव फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया की एक समिति ने किया. इस समिति के 15 सदस्य देश भर से चुने गए थे.
फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष एल सुरेश ने बीबीसी को बताया कि, "किसान भारत का रीढ़ की हड्डी की तरह हैं, उनके ज़िन्दगी को बेहतरीन तरीके से चरितार्थ किया गया, फिल्म में मीडिया के रोल को भी बहुत प्रभावी ढंग से दिखाया गया."एल सुरेश के मुताबिक, हर साल फिल्म फेडरेशन के पास दस से बारह फिल्मों की अर्ज़ी ही आती थी, लेकिन इस साल 27 फिल्मों ने ऑस्कर के नामांकन के लिए दौड़ में थीं.
उनके मुताबिक मुकाबला कड़ा होने के बावजूद 'पीपली लाइव' चुनने पर सहमति आसानी से बन गई.'पीपली लाइव' ने बॉलिवुड की हिट फिल्मों, 9/11 के हमले बाद अमरीका में मुसलमानों की ज़िन्दगी को दर्शाने वाली फिल्म 'माई नेम इज़ खान' और प्रोजेरिया बीमारी पर बनी फिल्म 'पा' को पछाड़ा.इसके अलावा एक नवयुवक की ज़िन्दगी पर आधारित निर्देशक विक्रमादित्य मोटवाने की फिल्म 'उड़ान' भी टक्कर में थी.
क्षेत्रीय फिल्मों में तमिल, मल्यालम, मराठी, कोंकणी और बंगाली भाषा की फिल्में भी फेडरेशन के सामने थीं.इस वर्ष रिलीज़ हुई 'पीपली लाइव' को आलोचकों और दर्शकों दोनों ने ही काफ़ी सराहा था.फ़िल्म पटकथा के अलावा अपने गानों के लिए भी ख़ूब चर्चा में रही है.'पीपली लाइव' में नायक की भूमिका निभाने वाले ओंकारदास मानिकपुरी इस फ़िल्म के बाद रातोंरात एक बड़े सितारे बन गए थे.छोटे बजट की इस फ़िल्म ने भारत में व्यापार भी अच्छा किया था. ख़ास बात ये है कि इस फ़िल्म में किसी भी बड़े बॉलीवुड सितारे ने अभिनय नहीं किया है.


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