'पीपली लाइव' में ऑस्कर जीतने के सारे गुण

By Jaya Nigam

अभिनेता आमिर खान के निर्देशन में बनी फिल्म 'पीपली लाइव' ऑस्कर पुरस्कारों के अंतिम नामांकनों में जगह बना पाएगी या नहीं, इस पर चर्चा करना तो जल्दबाजी होगी लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो भ्रष्टाचार और किसानों की आत्महत्या पर बनी यह 'एक पूर्ण फिल्म' है।

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भारत की ओर से ऑस्कर पुरस्कारों की विदेशी फिल्मों की श्रेणी के लिए 'पीपली लाइव' को भेजा गया है। अगले साल 25 जनवरी को नामांकनों की घोषणा होगी। साल 2009 में भारत की गरीबी पर बनी दो फिल्में ऑस्कर पाने में सफल रही थीं। इनमें से एक डैनी बोयल के निर्देशन में बनी 'स्लमडॉग मिलियनेयर' थी तो दूसरी अमेरिकी वृत्तचित्र फिल्मकार मेगान माईलन की फिल्म 'स्माइल पिंकी' थी।

मात्र सात करोड़ रुपये की लागत से बनी 'पीपली लाइव' ने बॉक्सऑफिस पर 28 करोड़ रुपये की कमाई की थी। अनुषा रिजवी के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने हर आम और खास को प्रभावित किया था। फिल्मों के जानकार उत्पल बोरपुजारी कहते हैं कि ऑस्कर नामांकन इस बात पर निर्भर करता है कि अन्य देशों से कैसी फिल्में आती हैं।

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फिल्म आलोचक अनुपम चोपड़ा के मुताबिक "नामांकन फिल्मों की उत्कृष्टा के साथ भाग्य पर भी उतना ही निर्भर करता है और इस तथ्य को नकारा नहीं जा सकता कि वह विश्व सिनेमा होगा। उनके लिए (ऑस्कर जूरी) फिल्मों का अपने देश की संस्कृति से गहराई से जुड़े होना मायने रखता है। ऐसा नहीं है कि वे फिल्मों पर मुग्ध हो जाते हैं या भारतीय गरीबी से सहानुभूति रखते हैं।" उन्होंने कहा, "यदि 'पीपली लाइव' की बात करें तो यह एक सम्पूर्ण फिल्म है। इसकी कहानी और गुणवत्ता को देखते हुए यह शीर्ष पांच नामांकनों में अपनी जगह बना सकती है। हाल के वर्षो में भारत की ओर से जो फिल्में भेजी गईं, उनमें यह सर्वश्रेष्ठ है।"

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