किसानों की फिल्म नहीं है 'पीपली लाइव' : अनवर जमाल

यह किसी भी तरह से किसानों की फिल्म नहीं है। इसमें उनकी स्थिति के लिए जिम्मेदार कारकों के रूप में बीजों, मानसून, कीटनाशकों आदि की समस्या नजर नहीं आती। किसानों के वास्तविक मुद्दों को छूआ तक नहीं गया है।"
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जिस पंजाब को उसकी हरियाली और लहलहाते खेतों, लस्सी के गिलासों और मक्खन के लिए जाना जाता है वहां पिछले 20 साल में 40,000 से ज्यादा किसानों ने आत्महत्या की है। विभिन्न समारोहों में प्रदर्शित जमाल की फिल्म किसानों की इन्हीं समस्याओं को उठाती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक 1997 से अब तक 200,000 किसान अपना जीवन समाप्त कर चुके हैं और किसानों की आत्महत्या का मूल कारण उनका कर्ज में डूबना है।
दीपा भाटिया का वृत्तचित्र 'नीरोज गेस्ट्स' देश में शहरी जीवन और किसानों की जिंदगी के बीच जमीन-आसमान के फर्क को दिखाता है। इसको बनने में पांच साल का समय लगा और इसके लिए दीपा ने विश्व में किसानों की आत्महत्याओं की राजधानी कहे जाने वाले महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र की यात्रा की। उनके साथ अपने लेखन के माध्यम से किसानों की समस्याओं की ओर शहरी लोगों का ध्यान आकर्षित करते रहे पत्रकार पी. साईंनाथ भी थे।


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