3 करोड़ की फिल्म 'सोच लो'

पन्नू ने कहा, "जब मैंने परियोजना शुरू की तो मेरे पास न पैसा था, न संरक्षण और न ही कार्यालय के लिए जगह थी। मेरे पास केवल इतना ही पैसा था कि मैं एक स्थानीय बैंक में खाता खोल सकूं। मैं अपने जुनून के चलते यह फिल्म बना सका हूं।" अमृतसर के नजदीक नौशेरा पन्नू गांव के रहने वाले पन्नू पिछले आठ सालों से मुंबई में लघु फिल्में बना रहे थे। आर्थिक तंगी के कारण उनकी इस फिल्म की परियोजना डगमगा गई।
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अट्ठाइस वर्षीय पन्नू ने बताया, "राजस्थान में हुई शूटिंग के बाद फिल्म का केवल 40 प्रतिशत हिस्सा शूट हो सका था और मैंने देखा कि इतने पर ही पूरा बजट खर्च हो गया है लेकिन मैंने कोशिश जारी रखी क्योंकि जितना हिस्सा शूट हुआ उससे फिल्म अच्छी लग रही थी।"
पन्नू ने पैसे की जुगाड़ में एक और कोशिश की। उन्होंने फिल्म के कुछ हिस्से यू-ट्यूब पर डाल दिए और उनका यह नुस्खा कारगर साबित हुआ। फिल्म निर्माण के लिए शेष धन हैदराबाद की एक कंपनी ने दिया जबकि इसमें मुख्य योगदान पन्नू के भाई करणबीर सिंह पन्नू का रहा।सौभाग्य से पन्नू भाइयों को शुरुआत में जितने बजट की जरूरत थी उसका तीन गुना धन उन्हें मिल गया। फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे पन्नू ने इस फिल्म की पटकथा भी लिखी है।


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