6 महीनों तक सड़ती रही एक्ट्रेस की लाश, परिवार को ना आया तरस, पिता ने कहा- 'बॉडी के साथ जो करना है करो'

Humaira Asghar Ali Death News: पाकिस्तान की मॉडल और एक्ट्रेस हुमैरा असगर अली की मौत की खबर ने सबको चौंका दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी मौत अक्टूबर 2024 में ही हो गई थी, लेकिन उनका शव 7 जुलाई 2025 को उनके घर से बरामद हुआ। सबसे दुखद बात ये है कि इतने महीनों तक किसी को भी उनकी मौत की भनक तक नहीं लगी।
32 साल की हुमैरा की मौत का खुलासा तब हुआ, जब उनके मकान मालिक ने किराया ना मिलने पर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के आदेश पर जब एक अधिकारी ने उनका दरवाजा तोड़ा, तो वह अंदर मृत पाई गईं। उनके शव की हालत बेहद खराब थी और अंदाजा लगाया गया कि उनकी मौत कई महीने पहले ही हो चुकी थी।
परिवार ने नहीं लिया शव
जब पुलिस ने हुमैरा के परिवार से कॉन्टैक्ट किया, तो उनके भाई ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि इस मामले में उनके पिता से बात करें। हुमैरा के पिता, जो कि एक रिटायर्ड मिलिट्री डॉक्टर हैं, उन्होंने भी शव लेने से इनकार कर दिया और कहा, 'हमने उससे बहुत पहले रिश्ता तोड़ लिया था, अब उसकी बॉडी के साथ जो करना है करो, हम कुछ नहीं करेंगे।'
अधिकारियों ने क्या कहा
साउथ कराची के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) सैयद असद रजा ने लोकल मीडिया को बताया कि जिस हालत में एक्ट्रेस हुमैरा असगर अली का शव मिला, उसे देखकर लगता है कि उनकी मौत दो से तीन हफ्ते पहले ही नहीं, बल्कि उससे भी पहले हो चुकी थी।
वहीं, फॉरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. सुमैया सैयद ने बताया कि शव बुरी तरह सड़ चुका था, जिससे साफ है कि मौत काफी पहले हुई थी। हालांकि शव की स्थिति चौंकाने वाली जरूर थी, लेकिन अधिकारियों ने किसी तरह की हिंसा या साजिश की आशंका से इनकार कर दिया है।
जांच में यह भी सामने आया कि घर में जबरन घुसने या शारीरिक चोट के कोई निशान नहीं मिले। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही यह साफ हो पाएगा कि हुमैरा की असली मौत की वजह क्या थी।
छह महीने तक किसी को नहीं हुआ शक
हुमैरा की मौत की सच्चाई तब सामने आई जब पुलिस ने उनके घर की तलाशी ली। उनके मोबाइल की आखिरी एक्टिविटी अक्टूबर 2024 में देखी गई थी। खाने-पीने की चीजें भी कई महीने पुरानी और खराब हो चुकी थीं। यह साफ है कि वो पिछले 6 महीनों से बिल्कुल अकेली थीं और किसी ने भी उनसे कोई संपर्क नहीं किया।
एक सवाल छोड़ गईं हुमैरा
हुमैरा असगर अली की मौत सिर्फ एक दुखद घटना नहीं, बल्कि समाज के लिए एक सवाल है। क्या हम वाकई अपनों का साथ निभा पा रहे हैं? क्या रिश्ते सिर्फ नाम के रह गए हैं? हुमैरा की जिंदगी और मौत इस बात का गवाह बन गई कि अकेलापन इंसान को किस हद तक तोड़ सकता है।


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