पैसा बेहद ज़रूरी है: ओम पुरी

'रंग दे बसंती' और 'दिल्ली 6' के बाद एक बार फिर फ़िल्ममेकर राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने अपनी अगली फ़िल्म 'मैड मैडर मैडेस्ट' में दिग्गज अभिनेता ओम पुरी को लिया है.
राकेश ओमप्रकाश मेहरा इस फ़िल्म के निर्माता हैं. ये पहला मौका है कि जब राकेश फ़िल्म बना तो रहे हैं लेकिन उसका निर्देशन नहीं कर रहे.
इसका निर्देशन करेंगे मृघदीप लाम्बा जिन्होंने इससे पहले सुभाष घई की 'युवराज' और फरहान अख्तर की 'डॉन' में बतौर सहायक निर्देशक काम किया है.
बीबीसी के साथ एक ख़ास बातचीत में ओम पुरी ने बताया की ये कहानी है तीन भाइयों की जो एक दुसरे को बिलकुल बर्दाश्त नहीं कर सकते.
ओम पुरी ने कहा 'ये एक मज़ेदार फ़िल्म है जहाँ इन तीन झगड़ालू भाइयों के दादा इनके लिए एक जायदाद छोड़ गए हैं और उसे हासिल करने के लिए इन भाइयों को न चाहते हुए भी एक साथ रहना पड़ता है. ये फ़िल्म कई रोमांचक मोड़ लेती है और कैसे ये तीनो भाई एक दूसरे के नज़दीक आते हैं, इसी बारे में है ये फ़िल्म'.
इस फ़िल्म में इन तीन भाइयों का किरदार निभा रहे हैं ओम पुरी, श्रेयस तलपड़े और दीपक डोब्रियाल और इसकी शूटिंग फरवरी में शुरू होगी .
ओम पुरी कहते हैं 'राकेश ओमप्रकाश महरा के साथ मेरी पहली मुलाक़ात 'रंग दे बसंती' के सेट्स पर हुई थी. वो बहुत अच्छी फ़िल्में बनाते हैं और उनके साथ काम करके मुझे बहुत अच्छा लगता है'.
इससे पहले भी ओम पुरी 'सिंह इज़ किंग', 'मालामाल वीकली', 'हेरा फेरी', 'चाची 420', 'जाने भी दो यारों' जैसी कई कॉमेडी फिल्मों में काम कर चुके हैं.
कॉमेडी के अलावा ओम पुरी अपने करियर में कई बहुमुखी किरदारों के लिए जाने जाते हैं. उनकी पहली फ़िल्म 'घाशीराम कोतवाल' 1976 में आई थी और तब से लेकर अब तक ओम पूरी लगभग 200 फ़िल्में कर चुके हैं.
इतने लंबे करियर में ओम पुरी ने अपने बेजोड़ अभिनय के लिए तो बहुत इज़्ज़त कमाई है लेकिन वो मानते हैं कि अब पैसा कमाने का वक़्त आ गया है. ओम पुरी कहते हैं की किसी भी फ़िल्म को चुनने के लिए वो देखते हैं कि उनका रोल कैसा है और उन्हें उसके लिए पैसा कितना मिल रहा है.
उन्होंने कहा 'अब तक के अपने करियर में मैंने ज्यादा कुछ नहीं कमाया लेकिन अब मैं 60 वर्ष से ऊपर हूँ और मुझे अपने परिवार के साथ-साथ अपने भविष्य के बारे में भी सोचना है. तो उसके लिए पैसा बेहद ज़रूरी है.'


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