नोबेल शांति पुरस्कार आख़्तिसारी को

फ़िनलैंड के पूर्व राष्ट्रपति मार्टी आख़्तिसारी ने कोसोवो के भविष्य पर हुई वार्ताओं में संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत की भूमिका निभाई और सन 2005 में इंडोनेशिया के आचे प्रांत को लेकर हुए समझौते में भी मध्यस्थ रहे.
मार्टी आख़्तिसारी ने नोर्वे के रेडियो को बताया कि वो यह पुरस्कार पाकर बहुत प्रसन्न हैं और आभारी अनुभव कर रहे हैं. विजेता को एक स्वर्ण पदक मिलता है, एक डिप्लोमा और एक करोड़ स्वीडिश क्रोनर जो लगभग 14 लाख 20 हज़ार डॉलर हुए.
| उन्होने कई गंभीर और लंबे समय से चले आ रहे संघर्षों को हल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई." |
चीन की चिंता
नोबेल पुरस्कार समिति ने 71 वर्षीय आख़्तिसारी की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होने कई महाद्वीपों में तीन दशकों से अधिक समय तक अन्तर्राष्ट्रीय संघर्षों को हल करने के महत्वपूर्ण प्रयास किए.
नामीबिया, आचे, कोसोवो और इराक़ में उनकी भूमिका की चर्चा करते हुए समिति ने आगे कहा, "उन्होने कई गंभीर और लंबे समय से चले आ रहे संघर्षों को हल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई."
समिति ने कहा, "उन्होने उत्तरी आयरलैंड, मध्य एशिया और अफ़्रीका में चल रहे संघर्षों के समाधान में भी रचनात्मक योगदान किया." आख़्तिसारी को यह पुरस्कार 10 दिसंबर को ऑस्लो में दिया जाएगा. 10 दिसम्बर को ही 1896 में इस पुरस्कार के संस्थापक स्वीडन के अंवेषक ऐल्फ़्रैड नोबेल का निधन हुआ था.
पुरस्कार के उम्मीदवारों की सूची में ज़िम्बाब्वे के राजनेता मॉरगन चंगिराई और फ़्रांसीसी कोलम्बियाई राजनेता इंग्रिड बेटनकोर्ट भी शामिल थे. चीन के भिन्न मतावलम्बी हू जिया और गाओ ज़िंशेंग भी प्रमुख उम्मीदवार थे जिसपर बेइजिंग ने दबे शब्दों में चेतावनी भी दी थी कि यह पुरस्कार सही व्यक्ति को दिया जाना चाहिए.


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