नीरज-अरशद की माओं ने प्यार से लांघी नफरत की सरहद, नदीम के संघर्ष की कहानी जानकर रो पड़ेंगे आप!

Arshad Nadeem Mother's Statement and His Story- पेरिस ओलंपिक्स जब से शुरु हुआ है हर दिन नया दिख रहा है और नई कहानियां सामने आ रही हैं। जैवलिन थ्रो में पाकिस्तान के अरशद नदीम ने गोल्ड पर निशाना साधा था तो वहीं भारत के नीरज चोपड़ा को सिल्वर से ही संतोष करना पड़ा था।
लेकिन इस दौरान दोनों की मां ने शरहदों को लांघते हुए ममता का पैगाम देश से उस पार पहुंचाया है। पहले नीरज चोपड़ की मां ने नदीम की तारीफ की थी और अब नदीम की मां ने नीरज को लेकर जो कुछ भी कहा है वो सुनकर आपकी आंखों में आंसू आ जाएंगे।
अरशद नदीम की मां ने नीरज के लिए कहा है, ''हार जीत अपनी किस्मत की होती है, वो भी मेरे बेटे की तरह है।'' इसके बाद उनकी तारीफ कर रहे हैं। लेकिन इस दौरान पाकिस्तान के अरशद नदीम की संघर्ष की कहानी भी खबरों का हिस्सा है जो कि यकीन करने से परे है। उन्होने किस तरह से ये ओलंपिक्स गोल्ड मेडल जीता है वो अपने आप में काफी इंसपायरिंग स्टोरी है।
पूरे गांव ने जमा किया पैसा, ऐसे ओलंपिक्स में आए नदीम
अरशद नदीम ने गरीबी में अपने खेल की तैयारी की है। एक ही जैवलिन से नदीम पिछले 7 महीने से तैयार कर रहे था। नदीम के पास संसाधनों की कमी थी तो उनके गांव वाले पैसे जोड़कर उनको देते थे। इस तरह से नदीम ने यहां तक का सफर तय किया।
आज नदीम ने पूरे पाकिस्तान को प्राउड फील करवाया है। पाकिस्तान को 32 साल बाद पहला ओलंपिक मेडल दिलाने वाले अरशद नदीम पंजाब के एक गांव खानेवाल के रहने वाले हैं। उन्होने उनका 92.97 मीटर थ्रो मारा था। इंडिया के नीरज चोपड़ा को हराकर अरशद नदीम ने ये गोल्ड जीता है। पाकिस्तान से करीब 7 खिलाड़ी आए थे जिनमें से सिर्फ नदीम ही वो खिलाड़ी थे जिनके पास टिकट के पैसे भी नहीं थे। नदीम के टिकट का पूरा खर्चा पाकिस्तान सरकार ने दिया था। अब उनका पूरा परिवार, गांव और पाकिस्तान खुश है।


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