नंदा को नहीं पसंद था अपनी जिंदगी को लेकर बात करना, आखिर क्या था राज़!
नंदा जब बहुत छोटी थीं तभी उनके पिता का निधन हो गया। पिता के निधन के बाद नंदा ने फिल्मों में कदम रखा और बतौर बाल कलाकार वो काफी प्रसिद्ध हुईं। नंदा के करियर के चलते उनकी निजी जिंदगी कहीं खो सी गयी थी। बड़ी होने के बाद नंदा के करियर का शुरुआती दौर थोड़ा कठिन रहा लेकिन बाद में नंदा ने एक के बाद एक हिट फिल्में देनी शुरु कीं। 1992 में नंदा ने बॉलीवुड निर्देशक मनमोहन देसाई के साथ सगाई कर ली। मनमोहन देसाई और नंदा काफी समय से एक दूसरे को पसंद करते थे और एक दूसरे के साथ ही अपना जीवन व्यतीत करना चाहते थे। लेकिन वक्त को शायद ये मंजूर ना था।
सगाई के दो साल बाद ही मनमोहन देसाई का निधन हो गया और उसके बाद से नंदा ने फिल्मों से लगभग अपना नाता खत्म कर लिया। नंदा की आखिरी फिल्म थी प्रेम रोग जिसमें उन्होंने मां का किरदार निभाया था। कहा जाता है कि नंदा जब भी बाहर जाती थीं तो वो सफेद साड़ी में जाती थीं क्योंकि वो मन ही मन मनमोहन देसाई को अपना पति मानती थीं। उनके निधन के बाद से नंदा काफी अकेली हो गयी थीं और उन्होंने ज्यादा किसी से बात करना भी बंद कर दिया था। उनकी खास दोस्तों में माला सिंह और वहीदा रहमान थीं।


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