जोड़ी नंबर वन फिर से पर्दे पर

By Staff
जोड़ी नंबर वन फिर से पर्दे पर

निर्माता-निर्देशक करण जौहर की आने वाली फ़िल्म ‘माइ नेम इज़ ख़ान’ का पहला ‘लुक’ मुंबई में पेश किया गया है.

इस प्रेम कहानी में शाहरुख़ ख़ान और काजोल प्रमुख भूमिकाओं में हैं. शिबानी बठीजा की लिखी इस कहानी के लिए शंकर-अहसान-लॉय ने संगीत दिया है.

फ़िल्म के बारे ऐसी ख़बरें हैं कि इसकी पृष्ठभूमि में आतंकवाद का गंभीर मुद्दा है. लेकिन फ़िल्म के निर्माता-निर्देशक करण जौहर ने साफ़ किया है कि 'माइ नेम इज़ का ख़ान' का आतंकवाद से कोई नाता नहीं है.

करण जौहर कहते हैं, “इस फ़िल्म में शाहरुख़ ख़ान एक डॉयलॉग बोलते हैं - माइ नेम इज़ ख़ान एंड आइ ऐम नॉट ए टेररिस्ट. इस फ़िल्म का कथानक बिल्कुल भी आतंकवाद पर आधारित नहीं है.”

जौहर कहते हैं कि ये फ़िल्म प्यार और क़ुर्बानी की एक मानवीय गाथा है.

प्रेम कहानी

शाहरुख़ ख़ान ने ‘माइ नेम इज़ ख़ान’ को एक सबसे बढ़िया प्रेम कहानी के रुप में पेश किया. शाहरुख़ ख़ान ने कहा, “ये एक ख़ूबसूरत प्रेम कहानी है, ये दो प्रेमियों की यात्रा की कहानी है. और जैसा कि सब प्रेम कहानियों में होता, इस फ़िल्म के अंत में भी तमाम मुसीबतों के बावजूद दोनों का मिलन होता है. ”

शाहरुख़ ख़ान कहते हैं कि करण जौहर हमेशा बड़ी फ़िल्में बनाते हैं लेकिन ‘माइ नेम इज़ ख़ान’ करण की बड़ी फ़िल्मों से भी बड़ी है.

शाहरुख़ ने कहा, “इस फ़िल्म की सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि करण ने इस बार ज़रा हटके फ़िल्म बनाई लेकिन इसमें करण जौहर के सिनेमा की छाप भी मौजूद है.”

काजोल और शाहरुख़ ख़ान ने हिंदी सिनेमा को कुछ यादगार और सुपरहिट फ़िल्में दी हैं. एक जमाने में बॉलीवुड की सबसे ज़बरदस्त जोड़ी मानी जाने वाले शाहरुख़-काजोल ने ने ‘बाजीगर’, ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’, ‘कभी खुशी कभी ग़म’, ‘कुछ कुछ होता है’ जैसी कामयाब फिल्में दर्शकों को दी हैं.

काजोल ने कहा, “शाहरुख़ के साथ काम करना एक बेहद बढ़िया अनुभव होता है.”

तिकड़ी

माइ नेम इज़ ख़ान के बारे में काजोल कहती हैं कि ये करण जौहर, शाहरुख़ ख़ान और उनकी, एक साथ मिल कर बनाई गई सबसे बड़ी फ़िल्म है.

काजोल कहतीं हैं, “सभी मुझसे पूछते रहते हैं कि क्या तुमने करण की फ़िल्म पूरी ली? मैं कहना चाहती हूं कि करण जौहर कि फ़िल्में हमें पूरा करती हैं और ये बात शाहरुख़ ख़ान के साथ भी लागू होती है.”

इस फ़िल्म के केंद्र में रिज़वान ख़ान हैं. ये फ़िल्म रिज़वान की चार साल की उम्र से लेकर चालीस साल की उम्र तक का ख़ाका खींचती है जिसमें वास्तविक घटनाओं का भी ज़िक्र होता रहता है.

करण जौहर अपने एक ख़ास किस्म के सिनेमा के लिए जाने जाते हैं जिसमें आकर्षक पटकथा के साथ-साथ बाज़ार की मांग और फ़िल्म की मार्केटिंग का भी पूरा ध्यान रखा जाता है.

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