'द केरल स्टोरी' के बाद, फिल्म 'अजमेर 92' को लेकर हंगामा शुरु, यहां जानें क्यों उठ रही है बैन करने की मांग!

Ajmer 92: द केरल स्टोरी के बाद, एक ओर जहां फिल्म '72 हूरें' विवादों का हिस्सा बन चुकी है, वहीं एक और फिल्म अपने विषय को लेकर चर्चा में आ रही है, जिसका नाम है 'अजमेर 92'। अगले महीने रिलीज होने वाली इस फिल्म को लेकर कई मुस्लिम संगठनों ने इसे बैन करने की मांग की है।
जमीयत उलमा-ए-हिंद द्वारा फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर खलबली मच गई है। उनका कहना है कि फिल्म कथित तौर पर एक विशेष अल्पसंख्यक समुदाय को टारगेट करती है। बता दें, ये फिल्म 15 जुलाई को रिलीज होने वाली है।
1992 के सच्ची घटना पर आधारित फिल्म
पुष्पेंद्र सिंह द्वारा निर्देशित इस फिल्म में बतौर कलाकार जरीना वहाब, सयाजी शिंदे, मनोज जोशी और राजेश शर्मा दिखेंगे। अजमेर -92 को वास्तविक घटना पर आधारित बताया जाता है, जब 250 से अधिक युवा लड़कियां को ब्लैकमेल कर उनके साथ बलात्कार किया गया था। कई वर्षों तक यह स्कैंडल चलता रहा, जब 1992 में यह सबके सामने आया। पीड़ितों में से अधिकांश स्कूल जाने वाली लड़कियां थीं, और कई ने कथित तौर पर बाद में आत्महत्या का प्रयास किया था।
फिल्म को बैन करने की मांग
इस फिल्म को लेकर जमीयत के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने कहा है, "अजमेर शरीफ दरगाह को बदनाम करने के लिए बनी फिल्म पर फौरन प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। आपराधिक घटनाओं को धर्म से जोड़ने के बजाय अपराधों के खिलाफ एकजुट कार्रवाई की जरूरत है। ये फिल्म समाज में दरार पैदा करेगी।"
उन्होंने आगे कहा, "अजमेर शहर में जिस तरह से आपराधिक घटनाएं सामने आ रही हैं वह पूरे समाज के लिए एक घिनौनी हरकत है। अभिव्यक्ति की आजादी एक वरदान के साथ-साथ लोकतंत्र की ताकत है। लेकिन इसकी आड़ में देश को तोड़ने वाले विचारों और धारणा को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता है।"
आरोपियों में शामिल थे कई बड़े नाम
बता दें, 1992 के इस केस में अजमेर दरगाह के केयरटेकर्स का नाम भी उछला था। साथ ही कुछ नेताओं के नाम भी सामने आए थे। इस कांड की शुरुआत हुई थी जब अजमेर के एक स्कूल की लड़की को फंसाकर उसके न्यूड फोटोज क्लिक गए थे। बाद में उसे ब्लैकमेल कर शोषित किया गया.. और फिर एक चेन बनती गई, जिसमें कई लड़कियां शिकार बनीं।


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