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राजीव खंडेलवाल के साथ एक मुलाक़ात

Posted By: संजीव श्रीवास्तव
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राजीव खंडेलवाल अपनी पहली ही फ़िल्म आमिर से चर्चा में हैं
बीबीसी एक मुलाक़ात में इस बार मेहमान हैं छोटे पर्दे के बड़े स्टार और बॉलीवुड में हाल ही में प्रवेश करने वाले राजीव खंडेलवाल.

आपको लोग भारतीय टेलीविज़न का शाहरुख़ ख़ान कहते हैं. जब आप जयपुर के सेंट्रल स्कूल में पढ़ते थे तो कभी आपने सोचा था कि एक दिन इतना बड़ा स्टार बनूँगा?

मुझे तो आज भी यकीन नहीं होता, 15 साल पहले की क्या कहूँ. वैसे भी मैं एसआरके नहीं बनना चाहता और सिर्फ़ आरके रहना चाहता हूँ.

लोगों की तरह मैंने भी ख्वाब देखे. जब मैं स्कूल में था तो मैंने भी खूब ख्वाब देखे थे. जानता था कि एक दिन सफल ज़रूर होऊंगा, लेकिन ख्वाब इतनी जल्दी हक़ीकत में बदलेंगे, इसका अंदाज़ा नहीं था.

सुबह ही मैं अपनी मां से बात कर रहा था और कह रहा था कि छह साल पहले जब मैं मुंबई आया तो नहीं सोचा था कि एक दिन मेरी भी फ़िल्म रिलीज़ होगी और बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगेंगे. लोग मेरी काम की तारीफ़ करेंगे. मैं चाहता हूँ कि ये ख्वाब ही रहे और कभी न टूटे.

और आपकी मां ने क्या कहा?

माँ ने कहा कि सच पूछो तो उन्हें भी यकीन नहीं था कि बेटा जयपुर से दिल्ली और फिर मुंबई जाएगा और एक दिन वह बेटे के इंटरव्यू अख़बार में पढ़ेंगी.

आपने कैमरे के पीछे से करियर शुरू किया, फिर कैमरे के सामने कैसे आना हुआ?

मुझे लगता है कि मैने कुछ ‘लवरब्वाय जैसे किरदार निभाएं हैं, उसके बाद लोग मुझे हैंडसम मानते हैं. मैं तो आज भी जब शीशा देखता हूँ तो सोचता हूँ कि काश थोड़ा सा और अच्छा दिखता
कैमरे के पीछे जाने की मेरी कोई योजना नहीं थी. दरअसल एक्टिंग के सिलसिले में मैं दिल्ली आया था. लेकिन दुर्भाग्य से दिल्ली में एक्टिंग की बहुत संभावनाएं नहीं हैं. अपनी रोजी-रोटी चलाने के लिए मैने लिखना शुरू किया. मैने डॉक्यूमेंट्री फ़िल्मों के लिए लिखना शुरू किया. फिर उन्हें प्रोड्यूस और डायरेक्ट करना शुरू किया. मैने करीब 30-35 डॉक्यूमेंट्री फ़िल्में बनाई हैं. फिर मैने एक बड़ा प्रोग्राम बनाया और उसे बेचने के लिए मुंबई आया. प्रोग्राम तो नहीं बिका, लेकिन मुझे कैमरे के सामने आने का मौक़ा मिल गया.

तो आप शाहरुख़ ख़ान के फैन भी हैं?

जिस तरह से उन्होंने अभी तक अपना जीवन जिया है, सफलता को हैंडल किया है. वो मेरे लिए आदर्श हैं. आप देख सकते हैं कि शाहरुख़ ने आत्मविश्वास के जरिये कहां से कहां तक का सफ़र तय किया है.

बिल्कुल. शाहरुख़ ने दिखाया है कि अपने दमखम पर आदमी कुछ बन सकता है?

जी. और सिर्फ़ इसी क्षेत्र में नहीं. युवाओं के लिए मैं कहना चाहूँगा कि अगर वे ठान लें तो कुछ भी असंभव नहीं है. सफलता का कोई फार्मूला या कोई नियम नहीं है.

‘कहीं तो होगा सीरियल जिसने राजीव खंडेलवाल को पहचान दी, कैसे मिला?

मैं मुंबई में था और काम ढूंढ रहा था. बेशक एक्टिंग को लेकर मैं बहुत आश्वस्त नहीं था. मुझे मालूम था कि मैं अच्छी एक्टिंग कर सकता हूं, लेकिन क्योंकि ज़्यादा अभिनय नहीं किया था, इसलिए बहुत ज़्यादा विश्वास नहीं था. मैं अक्सर मुंबई से दिल्ली पहुंच जाता था. दिल्ली में मुझे किसी ने बताया कि एआरएसडी कॉलेज में बालाजी का ऑडीशन चल रहा है.

वो भी अपने आप में एक किस्सा है. वहां मैं ऑडीशन देने के लिए पहुँचा. क्योंकि ऑडीशन का विज्ञापन अख़बार में दिया गया था तो आडीशन के लिए बहुत भीड़ थी.

मुझे लगा कि पब्लिक को मूर्ख बनाने के लिए ये सब किया गया है. मैं वापस जाने ही वाला था कि ऑडीशन लेने वालों में से एक ने मुझे रुकने के लिए कहा. कमाल की बात है कि मैने सूजल के करेक्टर के लिए ऑडीशन दिया था, लेकिन मुझे ‘क्या हादसा क्या हक़ीकत में भूमिका प्रस्ताव दिया गया. लेकिन बाद में मुझे सूजल की भूमिका दी गई और बस...

अच्छा ये बताएं आप दिखने में भी खूबसूरत हैं, इससे कितनी मदद मिलती है?

नहीं ऐसा नहीं है. मुझे लगता है कि मैने कुछ ‘लवरब्वाय जैसे किरदार निभाएं हैं, उसके बाद लोग मुझे हैंडसम मानते हैं. मैं तो आज भी जब शीशा देखता हूँ तो सोचता हूँ कि काश थोड़ा सा और अच्छा दिखता.

ये मैं विनम्र होकर नहीं बल्कि सच कह रहा हूँ. मैं आज भी मानता हूँ कि मेरे फीचर्स बहुत सामान्य या आम हैं. अगर मेरे साथ एक्टर राजीव खंडेलवाल न हो तो मुझे कोई मुड़कर भी नहीं देखेगा.

इतनी सारी लड़कियां आपकी प्रशंसक हैं. उनसे कैसे निपटते हैं?

मैने हमेशा से ही एक सीमा बना रखी थी कि जो लोग या लड़कियां आपको पसंद करती हैं दरअसल वो आपको नहीं बल्कि आपकी स्क्रीन वाली छवि को पसंद करती हैं. जितनी जल्दी मैं इस बात को मान लूं, उतना ही अच्छा मेरा जीवन होगा. शुरू के एक-दो महीने में ही मैने ये स्वीकार कर लिया था.

मुझे लगा था कि जब मैं ‘कहीं तो होगा छोडूंगा तो मामला कुछ हल्का हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. तो फंडा साफ़ है मैं जब उनके सामने होता हूँ तो एक्टर राजीव खंडेलवाल को आगे कर देता हूँ और जब घर में घुसता हूँ तो राजीव खंडेलवाल होता हूँ.

अपने बचपन के बारे में कुछ बताएँ?

मैं बहुत ही सामान्य लड़का था, हां पढ़ाई में औसत से कुछ ऊपर था. यानी 70-75 फ़ीसदी अंक लाने वाला. मैं नटखट था, लेकिन मेरी सोच नकारात्मक नहीं थी, मेरे स्कूल के फादर अब भी जब मुझसे मिलते हैं तो बहुत खुश होते हैं. मेरे स्कूल के टीचर, कॉलेज के प्रोफेसर आज भी मेरे संपर्क में हैं और मुझे प्यार करते हैं.

तो लोगों का प्यार मिलने का सिलसिला पुराना है?

हाँ. इस मामले में मैं खुशकिस्मत रहा हूँ. जब मेरी फ़िल्म रिलीज़ हुई तो मेरे एक अध्यापक का फ़ोन मुझे आया. उन्होंने मुझसे कहा, "शायद तुम्हें याद हो न हो लेकिन जब तुम 11वीं कक्षा में थे और तुम्हारा अवॉर्ड लेने के लिए हम दोनों प्रेसीडेंट हाउस दिल्ली गए थे, तब भाषण के दौरान तुमने कहा था कि सर एक दिन आप मुझे भी इसी तरह स्क्रीन पर अवॉर्ड लेते हुए देखोगे."

अच्छा ‘आमिर आपकी पहली फ़िल्म है. लोग इसकी काफ़ी तारीफ़ कर रहे हैं. कैसे मिली ये फ़िल्म?

मेरे लिए यहाँ भी एक सबक मिला कि इंतज़ार का फल मीठा होता है. मैने कभी नहीं सोचा था कि मैं आमिर जैसी फ़िल्म के साथ अपना करियर शुरू करूँगा.

मैं भी सोचता था कि रोमांटिक फ़िल्म से करियर की शुरुआत करूँगा. लेकिन जीवन में कुछ चीजें किस्मत से होती हैं. टेलीविज़न बहुत ज़्यादा नहीं किया था, लेकिन जो भी स्क्रिप्ट आ रहे थे वो वही सास-बहू टाइप थे. तभी मुझे किसी ने ये स्क्रिप्ट भेजी.

मुंबई से दिल्ली आते हुए विमान में मैने ये स्क्रिप्ट पढ़ी और विमान से उतरते ही मैने फोन कर अपनी हामी दे दी.

तब तो मुझे ये भी नहीं पता था कि ये अनुराग कश्यप के ग्रुप की स्क्रिप्ट है. इसके बाद तीन महीने में फ़िल्म की शूटिंग भी शुरू हो गई.

जब बड़े पर्दे के लिए कैमरे के सामने आए तो क्या कुछ अलग महसूस हुआ?

मैं बहुत घबराया हुआ था. इतना कि मैने अपने लाइन प्रोड्यूसर को बुलाया और कहा कि पहला शॉट कर पाऊँगा कि नहीं. बाबुल ने मुझसे कहा कि सिर्फ़ अपने बारे में सोचो लोगों की उम्मीदों के बारे में भूल जाओ. तब सेट पर लाइटिंग की जा रही थी मैं सेट पर दो घंटे तक बैठा रहा.

उसके बाद पहला टेक हुआ, बेशक मैं थोड़ा सतर्क था. डायरेक्टर ने कहा-ग्रेट राजीव, लेकिन एक टेक और. मैं समझ गया था. दूसरा टेक ओके. फिर पूरी फ़िल्म में मैने सिर्फ़ अपने नज़रिए से सोचा.

आमिर लीक से हटकर फ़िल्म है. लेकिन शाहरुख़ ख़ान जैसी गाने-बजाने वाली फ़िल्में करने का भी शौक होगा?

बिल्कुल. मैं हर तरह की फ़िल्म करना चाहता हूँ. मैं सब कुछ बहुत जल्द करना चाहता हूँ कि ताकि जल्दी से ये पता चल जाए कि मुझे क्या नहीं करना चाहिए. मेरी दूसरी फ़िल्म एक प्रेम कहानी है, जिसमें मैं गाने भी गाऊँगा और डांस भी करूँगा. फ़िल्म का नाम है ‘पीटर गया काम से.

बहुत मुश्किल किरदार है. आमिर में मैने जो किरदार निभाया उससे बिल्कुल अलग. मैं बहुत घबराया हुआ हूँ, जब तक मैं उसे निभा नहीं देता तब तक अपने नाखून चबाता रहूँगा.

जैसे ‘पीटर गया काम से में पीटर काम से जाता है, क्या राजीव भी काम से गया?

मैं चाहता हूँ कि टेलीविज़न की दुनिया को अलविदा कह दूं. मैं बिल्कुल नहीं चाहता कि वही करूं जो कर रहा हूँ. अगर मुझे टेलीविज़न करना भी पड़ा तो कुछ अलग करूंगा.
राजीव एक आम लड़का है जो हर रोज ‘काम से जाता है. आजकल लड़कियां बहुत खूबसूरत हैं. सिर्फ़ दिखने में ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वास के मामले में भी.

कभी-कभी मुझे लगता है कि लड़के तो लड़कियों से काफ़ी पीछे रह गए हैं. लड़कियां अक्सर मुझसे पूछती हैं, राजीव क्या मैं आपका हाथ पकड़ सकती हूँ? क्या आपके गले लग सकती हूँ? मैं सोचता हूँ कि क्या कोई लड़का किसी लड़की से ऐसा कह सकता है.

तो क्या टेलीविज़न की दुनिया को अलविदा कहने का वक्त है या फिर कुछ वक्त के लिए..?

मैं चाहता हूँ कि टेलीविज़न की दुनिया को अलविदा कह दूं. मैं बिल्कुल नहीं चाहता कि वही करूं जो कर रहा हूँ. अगर मुझे टेलीविज़न करना भी पड़ा तो कुछ अलग करूंगा.

आपके पसंदीदा सह कलाकार?

सभी सह कलाकार बहुत अच्छे हैं. मैं जानता हूँ कि ये बहुत ही कूटनीतिक जवाब है. प्रियंका, श्वेता साल्वे मेरी अच्छी दोस्त हैं.

फ़िल्मी दुनिया में आपकी पसंदीदा अभिनेत्री?

काजोल. मैं चाहता हूँ कि मुझे उनके साथ काम करने का मौक़ा मिले. उनके अलावा मैं नीतू सिंह के साथ लवस्टोरी करना चाहूँगा. मैं उन्हें एक पार्टी में मिला था और तब मैने उनसे कहा था कि इस पार्टी में सबसे खूबसूरत लड़की आप हैं, तब उन्होंने जवाब दिया कि पार्टी में सबसे खूबसूरत लड़के तुम लग रहे हो राजीव.

और पसंदीदा अभिनेता?

अमिताभ बच्चन. मुझे लगता है कि इस देश में ऐसा कोई नहीं होगा जो उन्हें पसंद नहीं करता. उम्मीद करता हूँ कि इससे पहले कि वो कहें कि मैं रिटायर हो रहा हूँ, मुझे उनके साथ कम से कम एक फ़िल्म में काम करने का मौक़ा मिले.

आपकी पसंदीदा फ़िल्म?

काफ़ी सारी फ़िल्में हैं. ऑलटाइम फेवरिट है शोले. कभी बच्चनजी की एक्टिंग के लिए देखता हूँ तो कभी संगीत के लिए. कभी जूनियर कलाकारों के अभिनय के लिए देखता हूँ. मुझे अमिताभ की ही शक्ति फ़िल्म भी काफ़ी पसंद है. नाना पाटेकर की प्रहार भी पसंद है.

आपका पसंदीदा किरदार?

अगर मौका मिले तो मैं ‘शक्ति का अमिताभ का या फिर प्रहार का नाने पाटेकर का किरदार निभाना चाहूँगा. और हाँ सदमा फ़िल्म का कमल हासन जैसा किरदार निभाने की भी तमन्ना है.

अभिनय के अलावा और क्या शौक हैं?

मुझे घूमने-फिरने, एडवेंचर स्पोर्ट्स का काफ़ी शौक है. मैं अब भी आम लोगों से मिलता हूँ. सड़क किनारे खड़े नारियल पानी वाले से मिलता हूँ. दो मिनट उससे बातचीत करना अच्छा लगता है. मुझे लिखने, पढ़ने का भी काफ़ी शौक है. अपना देश मुझे बहुत पसंद है. मैं सिर्फ़ काम से ही विदेश जाना पसंद करता हूँ.

किसी ने बताया कि राजीव खंडेलवाल को सफ़ाई की सनक है?

मैं इसे सनक तो नहीं कहूँगा. लेकिन हां मुझे सफ़ाई पसंद है. जहाँ मैं बैठता हूँ, रहता हूँ वहाँ साफ़ सफ़ाई चाहता हूँ. दिल्ली में मैं एक कमरे में रहता था और कोशिश रहती थी कि कमरे में सफ़ाई रहे.

आपकी सपनों की रानी कैसी होगी?

मुझ जैसी आम लड़की. मेरी तरह अपनी राय, अपनी सोच रखने वाली, थोड़ी नटखट हो. हर व्यक्ति का कुछ न कुछ लक्ष्य होता है. कुछ मुझसे अलग भी हो. वो घर गंदा करे और मैं सफ़ाई करता रहूँ.

आप छह साल में जयपुर से दिल्ली और दिल्ली से मुंबई पहुँचे. अगले 10 साल में आप खुद को कहाँ देखना चाहेंगे?

मुझे नहीं मालूम कि मुझे कहाँ पहुंचना है. लेकिन मुझे इतना मालूम है कि मैं जहाँ भी पहुँचूं, वहाँ से जब पीछे मुड़कर देखूं तो मुझे बहुत अच्छा लगे.

मुझे फ़ख्र हो कि मैने अपनी ज़िंदगी बहुत अच्छी तरह से जी है, अपने हिसाब से जी है. मुझे लगना चाहिए कि मैने जो सोचा था कर दिखाया.

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