युक्ता मुखी की फिल्म जल्द होगी रिलीज

फिल्म के प्रीमियर के लिए दिल्ली पहुंचीं युक्ता ने कहा, "चार साल पहले जब मैंने यह फिल्म चुनी थी तब इसकी कहानी का अंत अलग ढंग से किया जाना था। बाद में इसका अंत बदल दिया गया और मुझे यह तर्क दिया गया कि दर्शकों को यह अंत ज्यादा पसंद आएगा। हालांकि मैं इससे संतुष्ट नहीं हूं।"
वे कहती हैं, "हर किसी के जीवन से कई खट्टी-मीठी यादें जुड़ी होती हैं। मैं मानती हूं कि खट्टी यादों को भूलाकर अच्छी यादों के सहारे हमें आगे बढ़ते रहना चाहिए। अपनी इसी मान्यता के कारण मैं इस फिल्म के अंत से संतुष्ट नहीं हूं, क्योंकि फिल्म के अंत में मैं (अंजलि) आत्महत्या का रास्ता चुनती हूं।"
फिल्म वर्ष 1984 के दंगों में पीड़ित सिख समुदाय के परिवारों को केंद्र में रखकर बनाई गई है। युक्ता कहती हैं, "पुरानी पटकथा के अनुसार जेल की सजा काटकर अंजलि सुधर जाती है और समाजसेवा करने लगती है।"
उल्लेखनीय है कि फिल्म में युक्ता एक वेश्या (अंजलि) के किरदार में हैं, जो एक युवक से प्रेम करती है और उसके साथ जीवन गुजारना चाहती है। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर होता है। प्रेमी के घर जाकर अंजलि को पता चलता है कि बचपन में उसके साथ बलात्कार करने वाला उसके प्रेमी का पिता ही है। सच सामने आते ही अंजलि उससे बदला लेने की ठानती है और उसकी हत्या कर देती है और आखिरकार खुद को भी खत्म कर लेती है।
बहरहाल, युक्ता को खुशी है कि उन्होंने अपना काम पूरी ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ पूरा किया है। अब देखना यह है कि दर्शकों को फिल्म का यह अंत कितना पसंद आता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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