एक करोड़ कमाने वाली पहली भारतीय फ़िल्म

बॉलीवुड की वो फिल्में जिन्होंने भारतीय सिनेमा की दिशा और दशा बदल डाली।

By सुमिरन प्रीत कौर - बीबीसी संवाददाता

भारतीय सिनेमा की पहली फ़िल्म बनी थी 1913 में जिसका नाम था - राजा हरिशचंद्र . उसके बाद भी बहुत सी फ़िल्मे आईं जिन्होंने कुछ कुछ सालों मे भारतीय सिनेमा की दिशा और दशा दोनों बदली.

1) भारत की पहली टॉकी

क्यूरेटर, फ़िल्म इतिहासकार और लेखक अमृत गंगर कहते हैं , "हिन्दी सिनेमा की टाइम लाइन बनानी मुश्किल है क्योंकि हमारे पास ठोस सबूत नहीं , रिकॉर्ड्स नहीं. लेकिन कुछ बातें सब जानते हैं. भारत में वो फ़िल्म जिसमें पहले बार आपको लोग बोलते हुए दिखाई दिए वो थी 'आलम आरा' .1931 की 'आलम आरा' ज़्यादातर रात में शूट होती थी ताकि दिन में होते शोर और ट्रेन की आवाज़ ना रिकॉर्ड हो."

2) पहली फ़िल्म जिसने की एक करोड़ की कमाई - किस्मत

1943 की फ़िल्म 'किस्मत' में नज़र आए अशोक कुमार और मुमताज़ शांति .

अमृत गंगर कहते हैं , "कमाई इसलिए हुई क्योंकि वो वक़्त ऐसा था . कहानी ऐसी थी की भारत के लोग जो उस वक़्त "भारत छोड़ो आंदोलन" जैसे आंदोलन से जुड़े हुए थे और इस फ़िल्म में देश भक्ति की भावना थी . ये फ़िल्म कोलकाता के एक सिनेमा घर "रॉक्सी" मे 186 हफ़्तों तक लगी रही और ये रिर्कोर्ड तोड़ा 'शोले' ने . पहली फ़िल्म थी जिसने एक करोड़ की कमाई की. साथ ही वो पहली 'लॉस्ट आंड फाउंड' कहानी थी. 1917 में आई 'लंका दहन'. मुख्य कलाकार अन्ना सालुंके ने राम और सीता दोनों के किरदार निभाए. किसी भारतीय फ़िल्म में डबल रोल की शुरुआत करने वाले सालुंके पहले भारतीय कलाकार थे.

किस्मत
Bombay Talkies
किस्मत

सौ साल की हुई पहली डबल रोल फ़िल्म

3) भारत की पहली रंगीन फ़िल्म

पहली रंगीन फ़िल्म कौनसी थी इसका जवाब आसान नहीं. अमृत गंगर कहते हैं , "कलर भी किस्म किस्म के होते हैं . जो स्वदेशी भारतीय रंगीन फ़िल्म मानी जाती है वो है 'किसान कन्या' . इससे पहले कुछ कलर फ़िल्में बनी थी लेकिन वो पहली फ़िल्म थी जिसपर भारत में ही प्रयोग किया गया था . टेक्नोलॉजी का आयात हुआ . पहले फ़िल्मे बाहर प्रोसेस होती थी. ये फ़िल्म मूक फ़िल्म थी ."

किसान कन्या
Ardeshir Irani
किसान कन्या

तब ना कलर रील होती थी ना लैब तो एक एक सीन को हाथ से कलर किया जाता था. 1961 के साथ कलर फ़िल्में लगातार आईं,जिनमें से एक है शम्मी कपूर और सायरा बानो की 'जंगली' .

जंगली
Subodh mukherjee
जंगली

शाहरुख़ की ज़िंदगी का सबसे 'दुखद' दिन

'स्टार बनना आसान पर स्टारडम बनाए रखना मुश्किल'

4) पहली बार प्लेबैक सिंगिंग

फ़िल्म जिसमें पहली बार गाना गया गया वो है 'धूप छाँव'. ये एक बंगाली फ़िल्म की रीमेक थी. इस फ़िल्म के पहले भी प्लेबैक में एक्सपेरीमेंट हुए लेकिन यहां था 'सिस्टेमैटिक प्लेबैक'. अमृत गंगर कहते हैं , " इसका असर ऐसा हुआ कि जो सितारे पहले एक्टिंग करते और गाते भी थे उनका वक़्त ख़त्म हुआ . और गायक आए."

5) पहली महिला निर्देशक

पहली महिला निर्माता-निर्देशक रहीं फ़ातमा बेगम . वो स्टेज पर भी एक्टिंग करती थी . वो मूक फ़िल्में बनाते थीं . उनकी एक बेटी भी सुपरस्टार थी- ज़ुबेदा. ज़ुबेदा ही नज़र आई 'आलम आरा' में. उनकी कपंनी का नाम था 'फ़ातमा फिल्म कंपनी'.

आलम आरा
dada saheb phalke
आलम आरा
6) 1930 के दशक में आई फ़िल्मे जिनमें थे 'लिप-लॉक' सीन्स

1930 के दशक के शुरुआत मे फ़िल्में आईं जिनमें आपको पहली बार फ़िल्म में चुंबन देखने को मिला . एक फ़िल्म थी 'मारथंडा वर्मा'. इस वक़्त आई भारत की पहली अँग्रेज़ी फ़िल्म जिसमें थी देविका रानी और हिमांशु राय. फ़िल्म का नाम था 'करमा'. इससे हिन्दी में 'नागिन की रागिनी' के नाम से रिलीज़ किया गया . कुछ और फ़िल्में आई जिनका नाम था -अमारू हिन्दुस्तान और 1929 की 'अ थ्रो ऑफ डाइस' .

7) 'करमा' पहली फ़िल्म थी जिसकी शूटिंग के लिए लोग पहली बार भारत से बाहर लंदन गए. सालों बाद आई राजकपूर की 'संगम' फ़िल्म भी बाहर शूट हुई. 8) पहली फ़िल्म जिसपर लगा बैन

जब यहाँ ब्रिटिश राज था तब उन्हें ऐसी फ़िल्मों से दिक्कत थी जो उनके खिलाफ़ थी . 1921 की मूक फ़िल्म 'भक्त विदुर' में एक हिंदू पौराणिक चरित्र का किरदार था -विदुर, लेकिन उसके और गाँधी जी के बीच समानताएं थी. मुख्य किरदार ने गाँधी टोपी पहनी थी . इसलिए इस फ़िल्म को किया गया बैन.

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