डायरेक्टर या एक्टर की मौत के बाद पर पूरी हुई ये फ़िल्में!
उन फ़िल्मों की कहानी जिनके डायरेक्टर या एक्टर्स की मौत फ़िल्म पूरी होने से पहले ही हो गई।
फ़िल्म 'हीना' की शूटिंग का वक्त था. फ़िल्म के डायरेक्टर राज कपूर साहब दादा साहब फ़ाल्के पुरस्कार लेने पहुंचे हुए थे जहां अस्थमा के अटैक के चलते उनकी मृत्यु हो गई. 1988 में बन रही फ़िल्म हीना, 1991 में रिलीज़ हुई, जिसे राज कपूर के बेटे रंधीर कपूर ने डायरेक्ट कर पूरा किया.
1993 की रिलीज़ 'प्रोफेसर की पड़ौसन' के मुख्य अभिनेता संजीव कुमार का देहांत 1985 में इस फ़िल्म की शूटिंग के दौरान हो गया था. चूंकि फ़िल्म 75 प्रतिशत संजीव कुमार के साथ शूट हो चुकी थी तो उनकी मृत्यु के बाद स्क्रिप्ट को बदल दिया गया. इस फ़िल्म में संजीव कुमार को इनविज़िबल कर उनकी आवाज़ सुदेश भौंसले से डब कराई गई.
प्रोड्यूसर और डायरेक्टर के तौर पर विनोद मेहरा की इकलौती फ़िल्म 'गुरुदेव' 1993 में उनकी मौत के तीन साल बाद रिलीज़ हुई. विनोद इस फ़िल्म को पूरा किए बिना ही चल बसे. इसके बाद राज सिप्पी ने इस फ़िल्म का डायरेक्शन पूरा किया.
1994 की फ़िल्म 'लाडला' में श्रीदेवी से पहले दिव्या भारती लीड में थीं. 1993 में दिव्या के देहांत से पहले वो फ़िल्म का एक बड़ा हिस्सा शूट कर चुकी थीं. उनके मरने के बाद श्रीदेवी के साथ फिर से शूटिंग की गई. 'लाडला' की शीतल बनीं दिव्या की फुटेज इंटरनेट पर भी उपलब्ध है.
1966 की फ़िल्म 'बहारें फिर भी आएंगी' को पहले अभिनेता धर्मेंद्र की जगह गुरुदत्त लीड कर रहे थे. वो इस फ़िल्म के प्रोड्यूसर भी थे. 1964 में उनके गुज़रने के बाद धर्मेंद्र ने उनके किरदार को रिप्लेस किया.
इसी तरह 1996 की फ़िल्म 'आतंक' में अमजद ख़ान की आवाज़ डब कराई गई थी. उनकी देहांत 1992 में हो गया था.
हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री के पहले सुपरस्टार राजेश ख़न्ना के 2012 में गुज़रने के दो साल बाद उनकी फ़िल्म 'रियासत' रिलीज़ हुई. उनकी अपिरियंस और डायलॉग्स कई जगह रिपीट कर जैसे-तैसे फ़िल्म को पूरा किया गया.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)


Click it and Unblock the Notifications