शीत युद्ध खत्म, अनिल-अनुपम साथ

उल्लेखनीय है कि इस फिल्म के जरिए अनुपम और किरण खेर के बेटे सिकंदर खेर ने बालीवुड में कदम रखा है।
अनुपम ने कहा, "मैं दिल से चाहता था कि अनिल आएं। हालांकि पूरी उम्मीद नहीं थी। तीन से ज्यादा साल से हम एक-दूसरे के संपर्क में नहीं थे।"
उन्होंने एक साथ कई फिल्मों में काम किया है। उनमें से 'तेजाब', 'राम लखन', 'लम्हे', 'बेटा', 'दीवाना मस्ताना' और 'हम आपके दिल में रहते हैं' जबर्दस्त हिट रही थीं। अनुपम की पहली निर्देशित फिल्म 'ओम जय जगदीश' में भी अनिल ने अभिनय किया था।
दोनों के बीच दूरियों का कारण गांधीजी को माना जा रहा है।
अनुपम ने जब 'मैंने गांधी को नहीं मारा' की घोषणा की तो रातोंरात उन्हें मालूम हुआ कि अनिल ने भी 'गांधी माई फादर' की घोषणा कर दी है। अपनी फिल्म में अनुपम मुख्य भूमिका में भी थे जबकि अनिल की फिल्म में अक्षय खन्ना ने अभिनय किया है। इस घोषणा के बाद अनुपम को लगा माने अनिल ने उन्हें धोखा दे दिया और वहीं से दोनों की जोड़ी टूट गई।
अनुपम बताते हैं कि अनिल को आमंत्रित करने का निर्णय उन्होंने आवेश में लिया। वह अनिल के ऑफिस के सामने से गुजर रहे थे और अचानक उनके दिल से आवाज आई कि अनिल को भी निमंत्रण दिया जाए।
फोन नंबर बदल जाने के कारण वह अनिल को फोन नहीं कर सकते थे, इसलिए सोचा कि क्यों न ऑफिस जाकर सीधे उन्हें आमंत्रित कर लिया जाए।
प्रीमियर के मौके पर गुरुवार को दोनों एक-साथ मौजूद थे। अनुपम कहते हैं, "मेरे लिए यह एक यादगार पल था। मैंने खुद जाकर सभी को आमंत्रित किया था। बच्चन परिवार के सभी सदस्य, यश चोपड़ा, महेश भट्ट सहित अनिल ने वहां पहुंचकर मेरे लिए उस दिन को यादगार बना दिया है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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