"मैं फुटपाथ से आया हूं, खाना खाने तक का ठिकाना नहीं था, सुसाइड के ख्याल आते थे", सुपरस्टार ने दिया बयान

Mithun Chakraborty recalls his struggling days: वक्त हमेशा एक जैसा नहीं रहता.. ये बात मिथुन चक्रवर्ती जैसे स्टार के जीवन को देखकर सही लगती है। एक समय पर जिनके खाने तक का ठिकाना नहीं था, कुछ सालों के बाद उसी इंसान ने बैक टू बैक सुपरहिट फिल्में दीं और स्टार कहलाए।
मिथुन चक्रवर्ती ने हाल ही में इंडस्ट्री में अपने शुरुआती दिनों और अपने संघर्षों के बारे में बात की। आज वह इंडस्ट्री में किसी भी पहचान के मोहताज नहीं हैं। उनके पास सफल फिल्मों की लंबी लाइन है। लेकिन एक वक्त ऐसा भी था, जब वो सबकुछ छोड़कर वापस घर भाग जाना चाहते थे।
हॉस्टल के बाहर ही सो जाता था
मिथुन ने बताया कि उन्होंने मुंबई में कई दिन बिताए हैं जहां पर वह फाईव गार्डन में सोया करते थे। कभी-कभी वह हॉस्टल के बाहर सो जाते थे। एक बार तो उनके एक दोस्त ने उन्हें माटुंगा जिमखाना की सदस्यता दिला दी था ताकि वह वहां कि सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकें।
खाने- सोने की कोई ठिकाना नहीं था
एक्टर ने कहा, "मुझे नहीं पता होता था कि मैं कहां सोने वाला हूं, मेरा खाना कहां से आने वाला है। मैं उन लोगों का दिल नहीं तोड़ना चाहता जो स्ट्रगल कर रहे हैं। लेकिन मैं फुटपाथ ने यहां तक पहुंचा हूं।"
संघर्ष के दिनों में उम्मीद खोने की बात पर अभिनेता ने बताया कि एक समय था जब उन्हें लगा था कि वह कुछ नहीं कर पाएंगे। एक वक्त पर तो उन्होंने आत्महत्या के बारे में भी सोचा था। हालांकि उन्होंने कहा कि वह अपनी राजनीतिक बैकग्राउंड के कारण कभी भी कलकत्ता वापस नहीं जा सकते थे। इसीलिए वो मुंबई में बने रहे।"


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