साल में 6 फिल्में दे चुके ये स्टार...फैन्स में हिट...बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप
मनोज बाजपेयी इस साल 6 फिल्में दे चुके हैं और सारी फिल्में आपको किसी ना किसी स्तर पर प्रभावित ज़रूर करेंगी। लेकिन बॉक्स ऑफिस पर कलेक्शन की ज़िम्मेदारी अब मनोज बाजपेयी नहीं लेते।
एक साल में 6 फिल्में, और सभी आपको किसी ना किसी स्तर पर प्रभावित करती हैं। बात हो रही है मनोज बाजपेयी की। जो इस साल अलीगढ़, सात उचक्के, बुधिया, ट्रैफिक जैसी शानदार फिल्में दे चुके हैं। वहीं कृति और तांडव नाम की दो शॉर्ट फिल्में भी दे चुके।
इन सभी फिल्मों ने दर्शकों को प्रभावित किया है। लेकिन अगर बात बॉक्स ऑफिस की करें तो किसी भी फिल्म ने कमाई नहीं की। हां, अलीगढ़ ने ज़रूर अपना मुनाफा निकाला।

और इस बारे में मनोज बाजपेयी स्पष्ट और दो टूक बात करते हैं। उन्होंने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा कि फिल्म करना मेरी ज़िम्मेदारी है। उसे प्रमोट करना भी मेरी ज़िम्मेदारी है। और एक एक्टर के तौर पर मैं अपनी ज़िम्मेदारी पूरी तरह निभाता हूं।
["मैं कभी 100 करोड़ की फिल्म दे ही नहीं सकता"]
लेकिन फिल्म चलेगी या नहीं चलेगी, ये ज़िम्मेदारी हमेशा दर्शक की होनी चाहिए। उसे तय करना चाहिए कि उसे क्या देखना है और क्या नहीं देखना है। अब बॉक्स ऑफिस के आंकड़े मुझ पर ज़्यादा असर नहीं डालते।
वैसे देखा जाए तो बॉलीवुड में काफी कुछ बदल रहा है। अब ज़माना आ चुका है 'नया सनीमा' का जहां स्टारडम नहीं अभिनय और कला परोसी जा रही है। और अब ये पूरी एक खेप हो चुकी है।
[मैं कूड़ा भी बनाऊं तो वो 200 करोड़ कमाएगी]
पिछले कुछ सालों में आई कुछ फिल्मों को देखकर लगेगा कि वाकई ये कला है। जिसे सराहा जाना चाहिए पर उसे सहेजने की भी बहुत ज़रूरत है ।
कई ऐसे एक्टर्स हैं जिन्हें दर्शक अब सम्मान के साथ वो जगह दे रहे हैं जो एक कलाकार को मिलनी चाहिए। भले ही बॉक्स ऑफिस के शहंशाह ना हों लेकिन इन्हें अपना काम आता है और उनसे मिलने की आपको भी ज़रूरत है -
जिम्मी शेरगिल
जिम्मी शेरगिल ने माचिस से ही अपना जलवा दिखा दिया था और यशराज फिल्म्स ने उन्हें अपना नया चेहरा बनाया। लेकिन इसके बाद उनकी सफलता में केवल उनकी काबिलियत का योगदान है। 'यहां' से लेकर साहेब बीवी और गैंगस्टर, अ वेडनेसडे से तनु वेड्स मनु तक उनका सर्वश्रेष्ठ दिखा है। और राजा अवस्थी तो अपने यूपी वाले किरदार ही हैं फिर ;)
दिव्या दत्ता
दिव्या दत्ता हमेशा लीक से हटकर चलीं और यही उनकी ताकत है और खासियत भी। दिल्ली 6 के एक छोटे से रोल में भी वो बाकियों को साईड कर अपना काम कर निकल गई थीं।
साकिब सलीम
साकिब सलीम नए हैं और टैलेंटेड हैं और उतना उनके लिए काफी हैं। हवाहवाई को उनका करियर बेस्ट कहा जाए या बॉम्बे टॉकीज़ को इस बात पर थोड़ा डाउट है।
स्वरा भास्कर
स्वरा भास्कर के अभिनय में जितनी सच्चाई है वो शायद ही आज के किसी एक्टर में देखने को मिलेगी। सीधा, सहज और सरल अभिनय उनकी ताकत है। यही वजह है कि रांझणा की बिंदिया के आगे ज़ोया भी फीकी सी लगीं।
दीपक डोबरियाल
आपको पप्पी और ओमकारा का रज्जू पसंद आया होगा पर उनका करियर बेस्ट नॉट अ लव स्टोरी और गुलाल जैसी फिल्मों को माना जाएगा। शायद आपसे ये फिल्में मिस हो गई होंगी।
हुमा कुरैशी
हुमा कुरैशी ने डेढ़ इश्किया जैसी फिल्म में माधुरी दीक्षित के सामने और साथ अपनी जगह बनाई और इसे अचीवमेंट कहते हैं जनाब।
मोहम्मद ज़ीशान अयूब
अगर आपने नो वन किल्ड जेसिका देखी है तो आप उनसे नफरत करते होंगे। लेकिन रांझणा के मुरारी ने दिल जीता तो तनु वेड्स मनु में उन्होंने दिल जलाया!
रोनित रॉय
रोनित रॉय की फैन फॉलोईंग आज की नहीं है। पर उनकी स्टारडम से ज़्यादा बड़ा है उनका अभिनय जो एक सीन से ही दिख जाता है। उनका करियर बेस्ट हम नहीं चुके सकते!
रिचा चड्ढा
रिचा चड्ढा ने भोली बनकर जो कमाल उसने फुकरे में जान डाल दी। पर वसेपुर की नगमा ज़्यादा बेहतर या राम लीला की रसीला पता नहीं।
कंगना रनौत
इस लिस्ट की क्वीन है कंगना रनौत। तनु और दत्तो को इतनी बेहतरी से निभाने की काबिलियत शायद कम लोगों में हो। फैशन की बिगड़ैल मॉडल से लेकर क्वीन की भोली सी रानी तक वो परफेक्ट हैं।
राजकुमार राव
अगर क्वीन की बात हो तो उनके राजकुमार की बात भी होनी चाहिए। नए जेनेरेशन के बेस्ट एक्टर का खिताब उन्हें ही मिलना चाहिए। क्योंकि जितने वास्तविक ढंग से उन्होंने डॉली की डोली जैसी फिल्म में भी अपना किरदार जिया वो काबिले तारीफ है।


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