माघ मेला विवाद में ममता कुलकर्णी भी कूदीं, दिया कॉन्ट्रोवर्शियल बयान, कहा- '10 में से 9 शंकराचार्य झूठे'
Mamta Kulkarni controversial statement: कभी एक्ट्रेस रह चुकीं और अब साध्वी ममता कुलकर्णी ने रविवार को एक विवादित बयान दिया है, जिसके बाद वो खबरों में आ गई हैं। उन्होंने माघ मेला के दौरान संगम घाट पर हुए विवाद पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की जमकर आलोचना की।

उन्होंने कहा कि उनके अहंकार और व्यवहार की वजह से वह उन्हें शंकराचार्य नहीं मानती। ममता कुलकर्णी ने बताया कि असली शंकराचार्य आठवीं शताब्दी में हुए थे, जिन्होंने चार पीठों की स्थापना की और धर्म फैलाने के लिए इधर से उधर गए। उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की आध्यात्मिक योग्यता पर सवाल उठाते हुए कहा कि सिर्फ वेदों का ज्ञान होना किसी को शंकराचार्य नहीं बनाता। असली शंकराचार्य वह होता है जो सत्य का बोध करते ही सही कदम उठाता है।
पुराने शंकराचार्यों से तुलना
ममता ने कहा कि पुराने शंकराचार्य बहुत विनम्र होते थे और उनके शिष्य पूरी निष्ठा से उनसे जुड़े रहते थे। उन्होंने यह भी कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्य अनुभवहीन हैं और उनके बर्ताव में अनुभव की कमी साफ देखने को मिलती है।
ममता कुलकर्णी ने तो यह तक कह दिया कि दस में से नौ महामंडलेश्वर और तथाकथित शंकराचार्य झूठे हैं और उन्हें शून्य ज्ञान है
विवाद कैसे शुरू हुआ
यह विवाद माघ मेला के दौरान मौनी अमावस्या स्नान के समय शुरू हुआ। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, जो खुद को उत्तरी ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य कहते हैं, पारंपरिक पालकी यात्रा में संगम की ओर जाना चाहते थे। लेकिन प्रयागराज प्रशासन ने सुरक्षा कारणों और 'नो-व्हीकल जोन' नियम का हवाला देते हुए उन्हें रोक दिया। इसके बाद उनके शिष्य और पुलिस के बीच झड़प हुई, जिसमें धक्का-मुक्की के आरोप लगे।
स्वामी का धरना
इस पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने धरना शुरू कर दिया और प्रशासन से माफी मांगने तक भोजन और पानी लेने से इनकार कर दिया।
बाद में माघ मेला प्राधिकरण ने उन्हें कानूनी नोटिस भेजा और 'शंकराचार्य' की उपाधि इस्तेमाल करने पर सवाल उठाया। नोटिस में कहा गया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ये साबित करें कि शंकराचार्य हैं और उनके पास इससे जुड़े कागजात भी हैं तभी उन्हें शंकराचार्य माना जाएगा।


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