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    Ooo: तो सलमान और शाहरूख के साथ कभी काम नहीं करेंगे....ये FINAL है!

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    Deepika Padukone REJECTED by Majid Majidi for Beyond The Clouds: Here's Why ? | FilmiBeat

    काफी समय से ये खबरें थीं कि ईरानी फिल्ममेकर माजिद मजीदी की फिल्म बियॉन्ड द क्लाउड के लिए उन्होंने दीपिका पादुकोण को रिजेक्ट किया था। दीपिका ने इस फिल्म के लिए ऑडीशन दिया था। फिर उन्हें झटका देते हुए माजिद ने अपना प्रोजेक्ट शुरू कर दिया।

    इस फिल्म से शाहिद कपूर के भाई इशान खट्टर ने डेब्यू किया है। अब खबर है कि माजिद ने दीपिका को झटका नहीं दिया था बल्कि दीपिका की स्टारडम ने माजिद को झटका दे दिया था।

    दरअसल, माजिद ने बताया कि जब मैंने दीपिका का ऑडीशन किया तो उसके इंतज़ाम में ही काफी मेहनत लग गई। मैं शूट नहीं कर पा रहा था क्योंकि दीपिका का स्टारडम इतना बड़ा था कि लोग उसकी एक झलक देखना चाहते थे।

    मैं ज़्यादातर शूट ओरिजिनल लोकेशन पर करता हूं। दीपिका का फिल्म में रहना मेरे लिए काफी मुश्किल हो जाता। वैसे ये तो तय है कि अगर माजिद का कारण यही था तो वो शाहरूख - सलमान के साथ फिल्म बनाने की सोच भी नहीं सकते।

    इसी बहाने हम आपको दिखा देते हैं बॉलीवुड में स्टारडम का सफर। यानि कि बॉलीवुड के पहले से लेकर आखिरी सुपरस्टार तक -

    स्टारडम का सफर

    स्टारडम का सफर

    जब से फिल्में शुरू हुई हैं तब से बॉलीवुड में हमेशा हर दशक का या हर युग का एक स्टार ज़रूर रहा है, जिसके आगे पीछे सब भागते हैं। और बॉलीवुड में ये स्टारडम खत्म हो चुका है। शाहरूख - सलमान - आमिर तीनों बॉलीवुड में करीब 25 साल से राज कर रहे हैं और वाकई अगर किसी स्टार को आना होता तो अब तक दस्तक दे चुका होता। तो कुल मिलाकर मुद्दा ये है कि तीनों खान ने जिस तरह का स्टारडम देखा वो अब शायद ही कोई और सितारा कभी भी देख पाए।

    शो मैन

    शो मैन

    ये सब हुआ एक शो से सर्कस के एक शो। एक हंसता खिलखिलाता आदमी आया और सबको हंसाना सिखा दिया, रूला रूला कर। राज कपूर बॉलीवुड के शो मैन कहे जाते हैं।

    जीना यहां मरना यहां

    जीना यहां मरना यहां

    जो राजकपूर ने बॉलीवुड को दिया वो शायद कोई कभी सोच भी नहीं सकता। जीना यहां मरना यहां से उन्होंने शायद हर किसी को वो खोई हुई उम्मीदें जगा दी। साधारण सी कद काठी और चार्ली चैपलीन सा अंदाज़। कभी मेरा जूता है जापानी तो जिस देस में गंगा बहती है।

    एक से एक बेहतरीन फिल्में

    एक से एक बेहतरीन फिल्में

    राजकपूर ने नब्ज़ पकड़ी, जनता की और बॉलीवुड एक ज़रिया बन गया लोगों को जोड़ने का। एक से एक बेहतरीन फिल्में, कुछ हिट और कुछ फ्लॉप लेकिन राजकपूर बन गए, बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार। या फिर उससे भी ज़रा सा ऊपर।

    दिलीप कुमार - नया दौर

    दिलीप कुमार - नया दौर

    फिर आया नया दौर एक लड़का लोगों पर राज करने लगा। नाम था दिलीप कुमार। उन्हें भारतीय फिल्मों के सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, इसके अलावा दिलीप कुमार को पाकिस्तान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान निशान-ए-इम्तियाज़ से भी सम्मानित किया गया है।

    बेस्ट तस्वीर

    बेस्ट तस्वीर

    शाहरूख खान से लेकर अमिताभ बच्चन तक हर कोई आज भी दिलीप कुमार का फैन है। और हमेशा रहेगा। यही वजह है कि फिल्मफेयर ने जब ये शानदार फोटोशूट किया तो 100 साल के सिनेमा की ये शायद बेस्ट तस्वीर लगी, सभी को।

    एक और नया चेहरा

    एक और नया चेहरा

    फिर आया एक और नया चेहरा, इठलाता, झूमता और मस्ती में रहने वाला। देव आनंद। सामान्य सी कद काठी पर अंदाज़ बिल्कुल जुदा। 'पेइंग गेस्ट', 'बाजी', 'ज्वैल थीफ़', 'सीआईडी', 'जॉनी मेरा नाम', 'अमीर गरीब', 'वारंट', 'हरे राम हरे कृष्ण' और 'देस परदेस' जैसी कई हिट फिल्में दी।

    सब उनके मुरीद

    सब उनके मुरीद

    देव आनंद सही मायनों में भारत के पहले अंतराष्ट्रीय सितारे थे। भारत के बाहर जितनी प्रसिद्धि देव साब को मिली थी उतनी शायद ही किसी को मिली हो। चार्ली चैपलिन से लेकर फ्रैंक काप्रा और डी सिका तक सब उनके मुरीद थे।

    सही मायनों में स्टारडम

    सही मायनों में स्टारडम

    वो सितारा जिसने सही मायनों में स्टारडम का मतलब ही बदल दिया। राजेश खन्ना सही मायनों में स्टारडम को एक अलग ही स्तर पर लेकर चले गए। लड़कियां उनकी दीवानी थी। यहां तक कहा जाता है कि उनकी कार पर हमेशा लिप्सटिक के निशान रहते थे ...हमेशा!

    ऊपर आका और नीचे काका

    ऊपर आका और नीचे काका

    जिस तरह से आज टीवी के जरिये टैलेंट हंट किया जाता है, कुछ इसी तरह काम 1965 यूनाइटेड प्रोड्यूसर्स और फिल्मफेअर ने किया था। वे नया हीरो खोज रहे थे। फाइनल में दस हजार में से आठ लड़के चुने गए थे, जिनमें एक राजेश खन्ना भी थे। अंत में राजेश खन्ना विजेता घोषित किए गए। फिल्म इंडस्ट्री में राजेश को प्यार से काका कहा जाता था। एक कहावत बड़ी मशहूर थी- ऊपर आका और नीचे काका।

    बाबू मोशाय

    बाबू मोशाय

    राजेश खन्ना ने अपनी विरासत सौंप दी अपने बाबू मोशाय को और किसी को पता भी नहीं चला कि कब बॉलीवुड को उसका शहंशाह मिल गया। अमिताभ बच्चन की स्टारडम को आंकना बहुत ही मुश्किल है। उनके जैसी शख्सियत शायद कई सदियों में एक ही होती है।

    अमिताभ बच्चन के अद्भूत कारनामे

    अमिताभ बच्चन के अद्भूत कारनामे

    बिग बी के स्टारडम का आलम ये था कि 80 के दशक में पूरी एक कॉमिक्स उनके नाम पर थी। सुप्रीमो नाम की ये कॉमिक्स खूब चलती थी। सीरीज को नाम दिया गया था 'द एडवेन्चर्स ऑफ अमिताभ बच्चन' यानी की अमिताभ बच्चन के अद्भूत कारनामे। इस कॉमिक्स को काफी लोगों ने पसंद किया था लेकिन जब अमिताभ बच्चन राजनीति में उतरे तो यह सीरीज बंद कर दी गयी थी।

     पहला चॉकलेटी बॉय

    पहला चॉकलेटी बॉय

    इसके बाद बॉलीवुड को मिला इसका पहला चॉकलेटी बॉय। उम्र ज़्यादा नहीं थी इसलिए उसका सारी हरकतें माफ थीं। बात हो रही है ऋषि कपूर की। उनके स्टारडम का आलम ये था कि हिट हो या फ्लॉप वो धड़ाधड़ फिल्में करते जाते थे।

    92 फिल्मों में रोमांटिक हीरो

    92 फिल्मों में रोमांटिक हीरो

    ऋषि कपूर ने अपने करियर में 1973-2000 तक 92 फिल्मों में रोमांटिक हीरो का किरदार निभाया है। उन्होंने बतौर अभिनेता कई सुपरहिट फिल्मों में अभिनय किया है। चॉकलेटी हीरो के रूप में उन्होंने अपनी खास पहचान बनाई और बॉलीवुड कई रोमांटिक हिट फिल्में दीं।

    स्टारडम का अंत

    स्टारडम का अंत

    फिर खत्म हुआ स्टारडम का अंत जब तीन खान ने एक साथ बॉलीवुड में दस्तक दी। 25 साल हो गए अभी तक हमें कोई अगला सुपरस्टार नहीं मिला। आलम ये है कि शाहरूख - सलमान और आमिर को साथ में लाने के लिए पूरी इंडस्ट्री सपने देखती है।

    English summary
    Majid Majidi reveals the real reason for not signing Deepika Padukone
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