मद्रास कैफे को अवॉर्ड्स के लिए नहीं बनाया- जॉन अब्राहम

जॉन अब्राहम की फिल्म मद्रास कैफे को लेकर काफी सारी कॉंट्रोवर्सी चल रही हैं। फिल्म को तमिलनाडू में काफी विवादों का सामना करना पड़ रहा है लेकिन इसके बावजूद दूसरी तरफ मद्रास कैफे को इंडिया में रिलीज के बाद कई सारे पॉजिटिव रिस्पॉंस मिल रहे हैं। फिल्मी क्रिटिक्स को तो फिल्म इतनी पसंद आई है कि उनका कहना है कि इस तरह की फिल्में अगर बनने लगीं तो भारतीय सिनेमा जल्द ही इतना बदल जाएगा कि बॉलीवुड में बिना सेंस की मारधाड़ और फालतू की नॉनवेज कॉमेडी गायब ही हो जाएगी। क्योंकि मद्रास कैफे की तरह की फिल्में लोगों में एक अलग तरह के सिनेमा का टेस्ट डेवलप कर देगी। फिर बाकी बिना किसी सेंस की फिल्मों का वजूद ही खत्म हो जाएगा।

मद्रास कैफे फिल्म को लेकर जॉन अब्राहम ने अपने इंटरव्यू में कहा था कि उन्होंने मद्रास कैफे को अवॉर्ड के लिए नहीं बनाया है और ना ही पैसे कमाने के लिए बनाया है। जॉन का कहना है कि उन्होंने मद्रास कैफे इसलिए बनाई क्योंकि बतौर निर्माता वो चाहते हैं वो इस तरह की फिल्में बनाएं जो कि लोगों को एक अलग तरह का सिनेमा दे सके। साथ ही जॉन का कहना है कि बतौर एक्टर और बतौर निर्माता वो दो अलग तरह की पहचान चाहते हैं। उन्होंने कहा कि बतौर एक्टर वो उस तरह की फिल्में करते हैं जिनमें उन्हें लोग पसंद करते हैं और जैसा उनके निर्देशक उन्हें बताते हैं। लेकिन बतौर निर्माता वो इस तरह की फिल्में बनाना चाहते हैं जैसी वो खुद पसंद करते हैं और जैसी फिल्में वो चाहते हैं कि लोग देखें।

मद्रास कैफे को क्रिटिक्स के साथ ही इंडस्ट्री के कई बड़े निर्देशकों और एक्टरों का भी प्यार और सपोर्ट मिला है। साथ ही राजनीती और लेखकों की तरफ से भी मद्रास कैफे को काफी सारे पॉजिटिव कमेंट्स मिले हैं।

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