मधुबाला की 96 साल की बहन को परिवार ने किया इतना टॉर्चर, घर से निकाला, बिना खाना - सामान
बीते ज़माने की सुपरस्टार मधुबाला की बहन कनीज़ बलसारा को उनके परिवार ने घर से बाहर निकाल दिया है। कनीज़ जी को उनकी बहू ने ऑकलैंड में भारत आने वाली एक फ्लाईट में बिना किसी सामान और पैसों के बैठा दिया। भारत में जब कनीज़ की बेटी ने अपनी मां की हालत देखी तो चौंक गईं।
इतना ही नहीं, उन्हें हैरानी है कि 96 साल की कनीज़ बलसारा, इतना लंबा सफर तय करके अकेले आ गईं लेकिन उनका हाल ना ही किसी यात्री ने पूछा और ना ही एयरलाईन्स ने।

कनीज़ जी जब भारत पहुंची तो वो थोड़ी स्तब्ध थीं लेकिन अभी वो ठीक हैं। उनकी कहानी सुनकर हर कोई हैरान रह गया। कनीज़ बलसारा, मधुबाला की बड़ी बहन हैं। वो अपने परिवार के साथ ऑकलैंड न्यूज़ीलैंड में रहती थीं।
कनीज़ जी की बहू समीना ने उन्हें 28 जनवरी को भारत आने वाली एक फ्लाईट में बिना किसी साथी, सामान और पैसों के बैठा दिया। उन्होंने परिवार के किसी सदस्य को भी इस बात की जानकारी देना ज़रूरी नहीं समझा। भारत में फ्लाईट को 29 जनवरी रात 8 बजे लैंड होना था जिसके कुछ घंटों पहले कनीज़ जी की बहू समीना ने परिवार के एक दूर के सदस्य को इस बात की जानकारी दे दी कि कनीज़ जी रात 8 बजे मुंबई पहुंच जाएंगी।

साथ में पैसे तक नहीं थे
उस दूर के सदस्य ने कनीज़ जी की बेटी परवीज़ को बताया कि 96 साल की उनकी मां अकेले न्यूज़ीलैंड से आ रही हैं। परवीज़ बांद्रा में रहती हैं और जब उन्हें ये सूचना मिली वो हैरान रह गईं। वो उस समय मुंबई से दूर पालघर में थीं और आनन फानन में वापस मुंबई पहुंची। जब वो अपनी मां को लेने एयरपोर्ट पहुंची तो उन्हें बताया गया कि उनकी मां के पास RTPCR करवाने के भी पैसे नहीं है। परवीज़ ने कुछ पैसे अधिकारियों को भिजवाए।

18 साल पहले गई थीं न्यूज़ीलैंड
गौरतलब है कि कनीज़ बलसारा, अपने पति के साथ 17 - 18 साल पहलने ही न्यूज़ीलैंड शिफ्ट हो गई थीं। वहां उनका बेटा फारूक़ रहता था और वो उसके बिना नहीं रह सकती थी। फारूक़ भी अपनी मां से बहुत प्यार करते थे तो जब वो न्यूज़ीलैंड शिफ्ट हुए तो अपने माता पिता को भी साथ ले गए। वो न्यूज़ीलैंड के करेक्शन डिपार्टमेंट में काम करते थे। और वो एक सम्मानित व्यक्ति थे। उनकी पत्नी समीना को अपने सास - ससुर नहीं पसंद थे।

बहू और बच्चों ने हमेशा किया टॉर्चर
जब पूरा परिवार न्यूज़ीलैंड पहुंचा तब भी समीना की हरकतों में कोई बदलाव नहीं आया। वो कनीज़ जी के लिए खाना तक नहीं बनाती थी। फारूक़ अपने माता पिता के लिए पास के एक होटल से खाना मंगवाते थे। फारूक़ और समीना की एक बेटी है जिसकी ऑस्ट्रेलिया में शादी हो चुकी है लेकिन वो भी अपनी दादी कनीज़ जी से ज़्यादा जुड़ी नहीं थी। कनीज़ जी के पोते - पोती भी अपनी मां समीना के साथ उन्हें छोड़ने एयरपोर्ट आए थे।

बहन भी हैं स्तब्ध
परवीज़ बताती हैं कि वो अपनी मां से मिलने लगातार न्यूज़ीलैंड जाती थीं। कभी कभी साल में दो बार। लेकिन इधर पांच सालों से वो नहीं जा पा रही थीं क्योंकि उनकी भी उम्र हो चुकी थी और फ्लाईट में उनके ऑक्सीजन लेवेल कम होने लगते थे। मधुबाला की छोटी बहन मधुर भूषण ने भी टाईम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए बताया कि मुझे ये जानकर धक्का लगा कि मेरी बड़ी बहन कनीज़ बलसारा के साथ ऐसा दुरव्यवहार हुआ है।

बेटे की मौत को एक महीना नहीं हुआ
कनीज़ जी की बेटी परवीज़ ने बताया कि उनकी भाभी समीना पहले ही उनके माता पिता की इज़्जत नहीं करती थी और अब उसका टॉर्चर बढ़ गया होगा क्योंकि 8 जनवरी को उनके भाई, समीना के पति और कनीज़ जी के बेटे फारूक़ का निधन हो गया। इस बात को एक महीना भी नहीं गुज़रा और समीना ने पति की मां कनीज़ जी को घर से बाहर कर दिया।

भारत लौटते ही कहा भूख लगी है
जब कनीज़ जी मुंबई में अपनी बेटी परवीज़ से मिलीं तो उन्होंने सबसे पहले कहा - बेटा तुझे पता है फारूक़ मर गया। मैं उसे क़बर में डाल कर आ रही हूं। मुझे बहुत भूख लग रही है क्या मुझे कुछ खाने को मिलेगा? परवीज़ मां को घर ले गईं, उन्हें नहलाया और फिर उन्हें खाना खिलाया। परवीज़ ने बताया कि इसके बाद उन्होंने समीना को फोन किया लेकिन समीना को कोई फर्क नहीं पड़ता।

अकेली महिला ने की इतनी बड़ी यात्रा
अगर फर्क पड़ता को समीना 96 साल की एक वृ़द्ध महिला को अकेले फ्लाईट में ना बैठा देतीं। वो फ्लाईट ऑकलैंड से शुरू हुई और फिर सिंगापुर, बैंकॉक, कोलंबो होते हुए मुंबई आई। परवीज़ को हैरानी है कि इतनी लंबी यात्रा में एयरलाईन्स ने भी ये ध्यान नहीं दिया कि इतनी वृद्ध महिला अकेले कैसे सफर कर रही है। खासतौर से कोविड के समय में।

मां को क्या क्या देखना पड़ा
परवीज़ ने बताया कि समीना ने कनीज़ जी के सारे ज़ेवर और सामान हड़प लिया है। उनका सारा कैश और पेंशन भी छीन ली गई है। हालांकि परवीज़ कहती हैं कि उनके भाई फारूक़ अपनी मां की पूजा करते थे। पिता के गुज़र जाने के बाद वो मां को Day Care सुविधा में रखते थे। शाम में न्यूज़ीलैंड सरकार की ओर से एक नर्स एक घंटे के लिए आती थी और उनकी सफाई का ध्यान रखती थी। परवीज़ का कहना है कि उन्हें यकीन नहीं हो रहा है कि उनकी मां को अपने बेटे की मौत देखनी पड़ेगी और उसके बाद बहू का ये सलूक़।


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