'लव गुरू' से नाराज़ अमरीका के हिंदू

कुछ हिंदू संगठनों ने पैरामाउंट पिक्चर्स का बहिष्कार करने की अपील की है जिसने ये फ़िल्म बनाई है.
पैरामाउंट पिक्चर्स ने कहा है कि उनकी फ़िल्म में किसी धर्म विशेष का उल्लेख नहीं किया गया है. कंपनी का कहना है कि 'लव गुरू'की कहानी एक काल्पनिक धर्म पर आधारित है.
इस फ़िल्म में जाने-माने कॉमेडी अभिनेता माइक मायर्स ने मुख्य भूमिका निभाई है, फ़िल्म में उन्हें एक ऐसे अनाथ बच्चे के रूप में दिखाया गया है जिसका पालन-पोषण आश्रम में उसके गुरू करते हैं और वह बड़ा होकर अमरीका पहुँचकर लव गुरू बन जाता है.
फ़िल्म की कहानी में लव गुरू का मुख्य काम लोगों के वैवाहिक जीवन के झगड़े सुलझाने में मदद करना है.
हिंदु कार्यकर्ता फ़िल्म कंपनी की दलील से संतुष्ट नहीं हैं और उनका कहना है कि इस तरह की फ़िल्मों से हिंदू धर्म की छवि ख़राब होती है.
एक हिंदू कार्यकर्ता भावना शिंदे कहती हैं कि फ़िल्म निर्माताओं को लोगों की धार्मिक भावनाओं के मामले में सतर्क रहना चाहिए, उनका कहना है कि फ़िल्म में मुख्य पात्र को तिकल लगाए, केसरिया कपड़ा पहना और माला के साथ दिखाया गया है जो उसके हिंदू होने का आभास देता है.
फ़िल्म का विरोध करने वालों का कहना है कि अगर फ़िल्म के शुरू में यह स्पष्ट कर दिया जाता कि इस फ़िल्म में हिंदू धर्म का चित्रण नहीं किया गया है बल्कि यह एक काल्पनिक धर्म है तो वे विरोध नहीं करते, लेकिन फ़िल्म निर्माताओं ने ऐसा नहीं किया.
बचाव
पैरामाउंट पिक्चर्स के बचाव में जाने-माने योग गुरू दीपक चोपड़ा उतर आए हैं, उनका कहना है कि "यह सारी आलोचना सिर्फ़ ढाई मिनट के ट्रेलर को देखकर हो रही है, पूरी फ़िल्म देखे बिना आलोचना करना सही नहीं है."
लेकिन शिंदे दीपक चोपड़ा की दलील से सहमत नहीं हैं, वे कहती हैं, "फ़िल्म में साड़ी, बिंदी, सिंदूर जैसी चीज़ें दिखाई गई हैं और आश्रम, धर्म, कर्म, गुरू जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया है जो सीधे-सीधे हिंदू धर्म से जुड़े हैं. वे किस धर्म की बात कर रहे हैं?"
| फ़िल्म में साड़ी, बिंदी, सिंदूर जैसी चीज़ें दिखाई गई हैं और आश्रम, धर्म, कर्म, गुरू जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया है जो सीधे-सीधे हिंदू धर्म से जुड़े हैं. वे किस धर्म की बात कर रहे हैं |
ब्रिटेन में यह फ़िल्म अगस्त में रिलीज़ हो रही है और पैरामाउंट पिक्चर्स ने कहा है कि वह पहले हिंदुओं के एक समूह को फ़िल्म दिखाने के बाद ही इसे सिनेमाघरों में प्रदर्शित करेगी.
हिंदु संगठनों की माँग है कि इस फ़िल्म को 18 साल से कम उम्र के लोगों के वर्जित कर दिया जाना चाहिए ताकि कम उम्र के दर्शकों के मन में ग़लत छवि न बैठे.
इन संगठनों ने भारतीय फ़िल्म सेंसर बोर्ड को भी अपनी चिंताओं से अवगत कराया है.


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