अमिताभ ने बनाया लंदन दौरे को यादगार

अपने विश्व दौर के तहत पूरे बच्चन परिवार ने रविवार को लंदन में डेरा डाला और साथ में थी प्रीति ज़िंटा, रितेश देशमुख और संगीत निर्देशक विशाल और शेखर. लंदन में बॉलीवुड का जमावड़ा हो और यहाँ की फ़ेवरेट बन चुकी शिल्पा शेट्टी न हो ऐसा कैसे हो सकता है.
70 के दशक में जब अमिताभ लंदन में शो करने आए थे तो बकौल उनके शो में केवल पाँच लोग मौजूद थे. लेकिन रविवार शाम लंदन ने इसकी भरपाई कर दी जब करीब 20 हज़ार लोग शो में पहुँचे.
यहाँ का आलीशान और भव्य ओ-2 एरीना, खचाखच भरा हॉल, स्टेज पर धमाल करते कलाकार, इस धमाल में झूमते लोग......अन्फ़ॉर्गेटेबल टूर के अपने यूरोप पड़ाव के तहत बॉलीवुड ने लंदन में अपनी ज़बरदस्त मौजदूगी दर्ज कराई.
| दीवार की शूटिंग के दौरान मंदिर में माँ के लिए मन्नत माँगने वाला दृश्य करना मेरे लिए बेहद मुश्किल था. मुझे सुबह नौ बजे ये सीन करना था लेकिन रात को दस बजे मैं मानसिक रूप से तैयार हो पाया कि डायलॉग बोल सकूँ. आज इस समय मुझे मेरी माँ की याद आ रही है जिन्हें मैने पिछले साल खो दिया. दीवार के दृश्य में मैने भगवान से प्रार्थना की थी तो माँ वापस मिल गई थी लेकिन मैं जानता हूँ कि आज मैं 100 बार भी प्रार्थना करूँगा तो मेरी माँ वापस नहीं मिलेगी |
शो की शुरुआत रितेश देशमुख और प्रिटी वुमन ‘प्रीति ज़िंटा की प्रस्तुतियों से हुई, ऐश्वर्या और अभिषेक ने शो की गति को बनाए रखा तो शिल्पा के ठुमकों ने सबको हिला दिया. शो के रॉकस्टार साबित हुए विशाल और शेखर- स्टेज पर एक से बढ़कर एक गानों पर जिस जिस अंदाज़ से वो झूमे उसने हॉल में मौजूद सबको झूमने पर मजबूर कर दिया.
जब दर्शकों को लगा हो कि शो में इससे बेहतर क्या हो सकता है तो एंट्री ली सुपरस्टार अमिताभ बच्चन ने. पूरे हॉल के करीब बीस हज़ार लोगों ने खड़े होकर उनका अभिनंदन किया. उन्होंने साबित किया कि आख़िर क्यों कहती है दुनिया उन्हें हिंदी सिनेमा का शहंशाह. दिलकश आवाज़ में गाए एक से एक गानों पर जितनी तालियाँ अमिताभ ने बटोरीं, कोई भी दूसरा सितारा ऐसा नहीं कर पाया.
‘जहाँ तेरी ये नज़र है या फिर ‘रंग बरसे के रंग हों, अमिताभ की आवाज़ में ये गाने लोगों को सराबोर कर गए. जब बारी 'तेरी बिंदिया रे' की आई तो जया बच्चन भी कुछ देर स्टेज पर आईं.
भावुक हुए अमिताभ
शो में मौजूद लोग भावनाओं के कई रंगों में रंगते नज़र आए- कभी मस्ती, कभी धमाल तो कभी भूली बिसरी यादों में झांकने का मौका. लेकिन शो का सर्वश्रेष्ठ लम्हा शायद आख़िर के लिए बचा कर रखा गया था.
तालियों से गूँज रहा हॉल जहाँ आपको अपनी ही आवाज़ सुनाई न दे- ऐसे में जब अपनी पुरकशिश और पुरज़ोर आवाज़ में अमिताभ बच्चन ने फ़िल्मों के डायलॉग सुनाने शुरु किए तो हॉल कुछ देर के लिए सन्न हो गया.
फ़िल्म दीवार को वो डॉयलग जब विजय अपनी माँ की ज़िंदगी के लिए पहली बार भगवान की चौखट पर जाता है- वो डायलॉग जब अमिताभ ने अपनी आवाज़ में सुनाया तो शायद ही कोई आँख ऐसी नहीं होगी जो नम न हुई हो. ख़ुद अमिताभ भी भावुक हो गए.
अमिताभ ने बताया, "शूटिंग के दौरान भी इस दृश्य को करना मेरे लिए बेहद मुश्किल था. मुझे सुबह नौ बजे ये सीन करना था लेकिन रात को दस बजे मैं मानसिक रूप से तैयार हो पाया कि डॉयलॉग बोल सकूँ. आज इस समय मुझे मेरी माँ की याद आ रही है जिन्हें मैने पिछले साल खो दिया. दीवार के दृश्य में मैने भगवान से प्रार्थना की थी तो माँ वापस मिल गई थी लेकिन मैं जानता हूँ कि आज मैं 100 बार भी प्रार्थना करूँगा तो मेरी माँ वापस नहीं मिलेगी."
इसके बाद पूरे हॉल के लोगों ने खड़े होकर अमिताभ का ज़बरदस्त अभिनंदन किया. शो का समय ख़त्म हो रहा था तो भावुक माहौल को हल्का करने के लिए हुई वो प्रस्तुति जिसका इंतज़ार सबको था- कजरारे जिस पर अमिताभ, ऐश्वर्या और अभिषेक तीनों झूमे.
भरपूर मनोरंजन के साथ-साथ इस दौरे में बार-बार पर्यावरण संबंधी संदेश भी दिया गया.
अन्फ़ॉर्गेटेबल वर्ल्ड टूर टोरंटो, त्रिनिदाद, लॉस एंजेलेस और सैन फ़्रांसिस्को से होता हुआ लंदन पहुँचा था. जर्मनी और नीदरलैंड का दौरा रद्द कर दिया गया है.


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