भुवनेश्वर का ऐतिहासिक लिंगराज मंदिर
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हालांकि भुवनेश्वर तो किसी आम भारतीय शहरों जैसा है जहाँ सड़कों पर गाएँ नज़र आती हैं और ट्रैफ़िक का शोर है. लेकिन एक हज़ार साल पुराना यह मंदिर भुवनेश्वर को अलग शहर बनाता है.
चुनावी ख़बरों की गहमागहमी के बीच बीबीसी संवाददाता ने ये तस्वीरें उतारी हैं.
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माना जाता है कि इसका निर्माण 11 वीं सदी में सोमवंशी राजा ययाति केसरी ने तब करवाया था जब उन्होंने अपनी राजधानी जयपुर से भुवनेश्वर लाने का फ़ैसला किया था.
इस मंदिर का ज़िक्र कई प्राचीन ग्रंथों में भी मिलता है.
इस मंदिर के चार हिस्से हैं. मुख्य मंदिर के अलावा यज्ञ शाला, भोग मंडप और नाट्य शाला.
वैसे तो यह मंदिर शिव का है लेकिन इसमें शालिग्राम के रुप में विष्णु भी मौजूद हैं.
वास्तुकला की दृष्टि से लिंगराज मंदिर, जगन्नाथपुरी का मंदिर और कोणार्क एक साथ देखे जा सकते हैं.


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