87वें ऑस्कर पुरस्कार समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व करेगी लायर्स डाइस
नई दिल्ली। हिंदी फिल्म लायर्स डाइस को 87वें ऑस्कर पुरस्कार समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया है।

गीतू मोहनदास के निर्देशन में बनी यह फिल्म एक रोड ड्रामा है जिसमें एक ट्राइबिल महिला की अपने पति को तलाशने की कहानी को दर्शाया गया है। इस फिल्म को भारत की ओर से ऑस्कर समारोह के लिए विदेशी फिल्म की श्रेणी के लिए आधिकारिक तौर पर चुना गया है।
ऑस्कर पुरस्कार 22 फरवरी को आयोजित होने वाले हैं।
फिल्म में गीतांजलि थापा और गैंग्स ऑफ वासेपुर से लोकप्रिय होने वाले नवाजुद्दीन सिद्दकी ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। लायर्स डाइस ने अपनी इस एंट्री के लिए 29 और फिल्मों को पीछे छोड़ा है।
फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (एएफएफआई) के सेक्रेटरी जनरल सुपर्ण सेन ने इस बात की पुष्टि की है कि वर्ष 2015 में आयोजित होने वाले ऑस्कर पुरस्कार समारोह में लायर्स डाइस भारत की ओर से आधिकारिक एंट्री होगी।
एफएफआई ही वह संगठन है जो हर वर्ष ऑस्कर में जाने वाली भारतीय फिल्म के बारे में निर्णय करता है। एफएफआई को इस वर्ष 30 फिल्मों के आवेदन ऑस्कर के लिए हासिल हुए थे।
भारत-तिब्बत की सीमा पर स्थित एक गांव की पृष्ठभूमि में बनी इस फिल्म की कहानी एक ऐसी युवा लड़की की कहानी है जिसका पति काम के सिलसिले में दिल्ली जाता है और कई महीनों बाद भी लौटकर नहीं आता है।
ऐसे में वह फैसला करती है कि वह अपनी बेटी को लेकर दिल्ली जाएगी और अपने पति की तलाश करेगी। रास्ते में उसकी मुलाकात नवाजुद्दीन सिद्दीकी से होती है जो सेना की अपनी नौकरी को छोड़कर आता है।
लायर्स डाइस मोहनदास की पहली फिल्म है और इसे काफी सराहा भी गया है। फिल्म को सनडांस फिल्म फेस्टिवल के अलावा इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भी भेजा गया था और जहां पर इसे काफी तालियां मिली थीं।
फिल्म की अदाकारा थापा को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल हुआ है।
गौरतलब है कि भारत को अभी तक ऑस्कर की सर्वश्रेष्ठ विदेशी फिल्मों की श्रेणी में एक भी ऑस्कर अभी तक नहीं मिल सका। आशुतोष गोवारिकर की फिल्म लगान आखिरी भारतीय फिल्म थी जो इस कैटेगरी में टॉप फाइव तक पहुंची थी।
भारत की ओर से लगान के अलावा मदर इंडिया और सलाम बांबे ही दो फिल्में ऐसी रही हैं जिन्होंने टॉप फाइव तक का रास्ता तय किया है।


Click it and Unblock the Notifications











