सुरों के सरताज मन्ना डे का बैंगलोर में निधन, दुखी बॉलीवुड

मई 2013 में ही अपने जीवन के 94 साल पूरे करने वाले मन्ना डे पिछले काफी समय से बीमार चल रहे थे, उनका इलाज उनकी बेटी बैंगलोर में करा रही थी। मन्ना डे पिछले काफी समय से अपनी बेटी के साथ बैंगलोर में ही रह रहे थे ।
हिंदी और बंगाली समेत कई भाषाओं में 3500 से भी ज्यादा गाना गाने वाले गायक मन्ना डे को 2007 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार से नवाजा गया था। उनके गाये गाने जिनमें आनंद फिल्म का जिंदगी कैसी है पहेली....लागा चुनरी में दाग... इक चतुर नार...और ओ मेरी जोहराजवीं... आज भी लोग बड़े चाव से सुनते हैं।
मन्ना डे के जन्मदिन पर ममता बैनर्जी ने कहा था कि मन्ना डे की आवाज में जादू है जो हर किसी में नहीं होता। संगीत का यह महान उपासक आज भले ही जिंदगी को अलविदा कहकर चला गया लेकिन वह आज भी अपनी मधुर आवाज से लोगों के दिलों में धड़क रहे हैं। संगीत के इस महान जादूगर की पवित्र आत्मा को शांति मिले इस बात की दुआ वनइंडिया परिवार भी मांगता है।


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