लता मंगेशकर ने खो दिया अपना भाई और सच्चा दोस्त
यश चोपड़ा के जाने से पूरा बॉलीवुड शोक में डूबा हुआ है। उनके जाने का दुःख तो हर एक शख्स को है लेकिन सबसे ज्यादा जो लोग उनकी कमी महसूस कर रहे हैं उनमे शामिल है अमिताभ बच्चन, शाहरुख़ खान और लता मंगेशकर. बॉलीवुड के शहेंशाह अमिताभ बच्चन और बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख़ खान को बॉलीवुड में उनके मक़ाम तक पहुँचाने वाले यश जी ही थे। शाहरुख़ के लिए तो यश जी उनके पिता तुल्य थे और यश जी के जाने से शाहरुख़ खुद को यतीम सा महसूस कर रहे हैं। इसके आलावा हमारे देश की स्वर कोकिला कही जाने वाली लता मंगेशकर भी यश जी के जाने से अत्यंत दुखी हैं वो अपने दुःख को व्यक्त कर पाने में भी खुद को असमर्थ महसूस कर रही हैं. इसके बावजूद उन्होंने मीडिया से बात की और यश जी से जुडी अपनी कुछ मीठी यादें बांटीं।

लता ने कहा यश जी के निधन की खबर बहुर दुखद है। इस दुःख को सहने की हिम्मत मुझे कोई नहीं दे सकता. मुझे बताया गया की उन्हें डेंगू हुआ है. मैंने उन्हें फ़ोन करने की कोशिश की लेकिन उनका फ़ोन स्विच ऑफ था। मैंने उनसे मिलने अस्पताल जाने की सोची लेकिन पारिवारिक समस्याओं के चलते मैं ना जा सकी। अब मैं उन्हें कभी नहीं देख पओंगी। मैंने अपने सच्चे दोस्त और प्यारे भाई को खो दिया है। वो मुझे अपनी जान से भी ज्यादा चाहते थे। 1959 में जब वो निर्देशक बने तभी उन्होंने मुझसे ये कहा की मुझे उनकी हर एक फिल्म में गाना गाना होगा। मैंने वक़्त फिल्म को छोड़कर उनकी हर एक फिल्म में गाना गया है। १९७३ में दाग फिल्म से जब वो निर्माता बने तब उन्होंने मुझे बुलाकर अपनी फिल्म की पूरी कहानी और हर एक गाने से जुडी स्थिति से अवगत कराया। उन्हें आना नहीं गाना आता था लेकिन इसके बावजूद उन्हें संगीत की बहुत अच्छी समझ थी।
लता ने आगे कहा यश जी की पत्नी पैम न सिर्फ अच्छा गाती थीं बल्कि उन्हें हिन्दुस्तानी क्लासिकल संगीत की भी अच्छी समझ थी। यश जी फिल्मों के संगीत में एक चीज़ जो आप हमेशा पाएँगे वो है पंजाबी रिदम पर आधारित गाने। यश जी को कविता की भी बहुत अच्छी समझ थी. कभी कभी फिल्म में उनकी ये समझ नज़र आती है। मुझे लगता है की यश जी आने वाले फिल्ममेकर्स के सीखने के लिए काफी कुछ छोड़ गए हैं. वो खुद में फिल्म निर्माड का पूरा इंस्टिट्यूट थे। वो फिल्म का हर एक फ्रेम बहुत ख़ूबसूरती से बनाते थे। मुझे इस बात की बहुत ख़ुशी और गर्व है की मैंने यश जी की खुसुरत हेरोइनो को अपनी आवाज़ दी। लेकिन मैं और यश चोपड़ा प्रोफेशनल होने के साथ साथ काफी करीबी दोस्त भी थे। वो मेरे भाई थे और मुझे बहुत प्यार करते थे। सिनेमा उनका पैशन था। यश जी काफी समय से मुझे अपने स्टूडियो और घर बुला रहे थे लेकिन मैं नहीं जा पाई अब मैं ये सारी बातें मिस करुँगी। मुझे पैम जी के लिए बहुत दुःख है।


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