क्‍योंकि सास..का सफर हुआ खत्‍म

इस धारावाहिक की शुरूआत वर्ष 2000 में हुई थी, जल्द ही इसके किरदार हर घर में पहचाने जाने लगे। हर सप्ताहांत के बाद लाखों लोग गुजराती परिवार की कहानी और इसकी बहू तुलसी (स्मृति ईरानी) को देखने लगे।
तुलसी ने अपने परिवार को एक साथ जोड़े रखने के लिए हमेशा संघर्ष किया। अपने पांचवें साल में भी यह धारावाहिक लोकप्रियता की सूची में अव्वल नंबर पर था।
इस धारावाहिक ने 1500 एपिसोड का आंकड़ा पार कर लिया था, इसके बावजूद काल्पनिक वीरानी खानदान में संघर्ष जारी था, लेकिन बालाजी टेलीफिल्मस के स्टार टीवी से कानूनी लड़ाई में हार जाने के बाद आठ साल से चली आ रही इस महागाथा का अंत हो गया।
लेकिन इसके बाद इस धारावाहिक की टीआरपी लगातार गिरने लगी और स्टार टीवी जो हर एपिसोड़ पर 27 लाख रुपए खर्च कर रहा था, को अपने बाजार खोने का डर सताने लगा। इसके बाद चैनल ने इसका प्रसारण 10 नवम्बर से बंद करने का निर्णय लिया।
बाद में यह मामला अदालत पहुंचा, जहां एकता कपूर ने पूर्व में हुए करार का हवाला दिया, लेकिन अदालत ने स्टार टीवी के पक्ष में फैसला सुनाया।
लेकिन 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी" के दर्शकों को निराश होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि बालाजी टेलीफिल्मस इस धारावाहिक को प्रतिद्धंदी चैनल पर प्रसारित करने के लिए बातचीत कर रहा है।


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