For Quick Alerts
    ALLOW NOTIFICATIONS  
    For Daily Alerts

    कोलावरी डी के साथ गुम हुईं कई आवाजें

    |
    इस साल भारतीय संगीत में कई ऐसे गाने छाये रहे, जिन्हें परंपरागत तो नहीं कहा जा सकता। गानों में अशिष्ट भाषा के प्रयोग का चलन भी सामने आया और जीवनपर्यत संगीत प्रेमियों को आनंदित करती रही कुछ जादुई आवाजें सदा के लिए खामोश हो गई।

    साल के शुरू में ही संगीतप्रेमियों को उस समय बडा झटका लगा, जब भारतीय शास्त्रीय संगीत के जाने माने गायक भारत रत्न से सम्मानित भीमसेन जोशी चिरनिद्रा में लीन हो गए। 24 जनवरी को किराना संगीत घराने के इस 88 वर्षीय संगीत पुरोधा का निधन हुआ और शास्त्रीय संगीत की गौरवशाली परंपरा से जुडी एक जादुई आवाज अपनी प्रतिध्वनि पीछे छोड दुनिया से चली गयी।

    बॉलीवुड संगीत की बात करें तो यह साल लीक से हटकर संगीत बनाने वालों और इस तरह के संगीत को पसंद करने वालों के नाम रहा। गीत के बोलों को लेकर जमकर प्रयोग किए गए। इस दौरान अशिष्ट शब्द, द्विअर्थी शब्द हिंग्लिश भाषा के गीत लोगों को खासे पसंद आए।

    आयटम नंबर के नाम पर फूहड गीत संगीत प्रचलन में रहा और हैरत की बात यह रही कि श्रोताओं ने इसे पसंद किया। आइटम नंबरों में डबल धमाल फिल्म का जलेबी बाई गीत, थैंक यू फिल्म का रजिया गुंडों में फंस गयी, रेडी फिल्म का गीत कैरेक्टर ढीला, रॉ-वन फिल्म का छम्मक छल्लो गीत और डर्टी पिक्चर फिल्म का ऊ ला ला, ऊ ला ला... जैसे गीत छाये रहे।

    इन गीतों की फूहड बोलों की वजह से आलोचना भी हुई। जुलाई में आयी फिल्म देहली बेली अपनी कहानी और कलाकारों से ज्यादा अपने द्विअर्थी गीतों की वजह से चर्चित हुई। राम सम्पत के संगीत से सजी इस फिल्म का गीत भाग डीके बोस अपने दोहरे अर्थ को लेकर जमकर विवादों में रहा। यह गीत लोकप्रिय हुआ और इससे जुडे विवाद का फिल्म को फायदा भी मिला और यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल रही।

    इस साल वैसे तो कई गाने चर्चित हुए लेकिन तमिल सनसनी रजनीकांत के दामाद और तमिल अभिनेता धनुष का गाया कोलावरी डी गीत बिना बात ही चर्चा में आ गया। गीत को पसंद करने वालों में देश ही नहीं विदेश के लोगों की भी भरमार रही। कोलावरी डी ने उत्तर और दक्षिण भारत की दूरी कम कर दी और लोकप्रियता के तमाम रिकार्ड तोड दिए। तमिल फिल्म 3 के इस गाने के वीडियो को करोडों लोगों ने इंटरनेट पर देखा।

    वर्ष 1992 में आई रोजा फिल्म के गीत के बाद कोलावरी डी के रूप में पहली बार कोई भारतीय गाना टाइम पत्रिका के दस सर्वश्रेष्ठ गीतों की सूची में शामिल हुआ। इसे यूटयूब गोल्ड पुरस्कार भी दिया गया।

    शास्त्रीय संगीत प्रेमियों के लिए यह साल गमगीन करने वाला रहा। भीमसेन जोशी के अलावा कई नामचीन फनकार दुनिया छोडकर चले गए। इनमें ध्रुपद गायक फहीमुद्दीन डागर, रूद्र वीणा वादक असद अली खान और प्रसिद्ध सारंगी वादक और गायक सुल्तान खान शामिल थे। इन फनकारों के निधन से शास्त्रीय संगीत की दुनिया को अपूरणीय क्षति पहुंची। शास्त्रीय संगीत के अलावा दूसरी गायन शैली के भी कई कलाकार दुनिया से विदा हुए। इनमें गजल सम्राट जगजीत सिंह और असम के प्रसिद्ध गायक और संगीतकार भूपेन हजारिका का नाम शामिल है। गजल गायिकी को नया जीवन देने वाले और आम संगीत प्रेमियों में लोकप्रिय करने वाले जगजीत सिंह के निधन के साथ गजल गायिकी के एक युग का अंत हो गया।

    वहीं असमिया संगीत को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले गायक हजारिका का 85 साल की उम्र में निधन होने से पारंपरिक गायिकी के संसार में एक सूनापन छा गया। इस साल भारत विदेशी फनकारों का पसंदीदा ठिकाना रहा। जहां प्रसिद्ध अमेरिकी गायक एकॉन ने शाहरूख खान की फिल्म रॉ-वन का छम्मक छल्लो गीत गाया वहीं लेडी गागा फार्मूला वन के समारोह में अपने बिंदास गायिकी का नजारा पेश करती दिखीं। विदेशी संगीत के शकीरा, पिटबुल जैसे नामचीन फनकार भी इस साल भारत आए।

    English summary
    In this year Kolaveri di song is become anthem of youth and also vulgar language become new trends of songs and music.
    तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
    Enable
    x
    Notification Settings X
    Time Settings
    Done
    Clear Notification X
    Do you want to clear all the notifications from your inbox?
    Settings X
    X