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    पांच साल बाद दाढ़ी बनाई

    By Staff
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    अभिषेक बच्चन की नई फ़िल्म 'खेलें हम जी जान से' चट्गांव विद्रोह पर आधारित है.नई फ़िल्म 'खेलें हम जी जान से" में अभिनेता अभिषेक बच्चन बहुत दिनों बाद एक नए रूप में नज़र आए हैं.अपनी लुक के बारे में अभिषेक कहते हैं, “ किसी फ़िल्म के लिए कुछ पांच साल के बाद मैंने दाढ़ी बनाई है. हम ऐक्टर हैं और ये हमारे हाथ में नहीं होता कि हम कैसे दिखें. ये फ़ैसला डायरेक्टर का होता है. मुझे लगता है कि अगर आपकी लुक आपके किरदार के हिसाब से है तो आप अपना काम बख़ूबी निभा रहे हैं."

    ये बात अभिषेक बच्चन ने बीबीसी के साथ एक ख़ास बातचीत में कही. फ़िल्म का निर्देशन आशुतोष गोवारीकर ने किया है. उनसे भी बीबीसी ने बात की.फ़िल्म 'खेलें हम जी जान से" भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हुए 1930 के चट्गांव विद्रोह पर आधारित है . ये मानिनी चैटर्जी की अंग्रेज़ी किताब 'डू एंड डाई" से प्रेरित है.

    ये पहला मौका नहीं है जब आशुतोष गोवारीकर ने ऐताहासिक पृष्ठभूमि पर फ़िल्म बनाई हो. इससे पहले उन्होंने 'लगान" और 'जोधा-अकबर" बनाई थीं जो इतिहास से प्रेरित थीं हालांकि उनकी आखिरी फ़िल्म 'व्हॉट्स योर राशि" रोमांटिक फ़िल्म थी.

    खेलें हम जी जान से को बनाने की वजह के बारे में आशुतोष कहते हैं, “इस विद्रोह के बारे में लोग ज़्यादा नहीं जानते हैं. मुझे भी इसके बारे में मानिनी चैटर्जी की किताब से पता चला. मुझे लगा कि मुझे इसे पूरे देश के साथ बांटना चाहिए और तब मैंने इस विषय पर फ़िल्म बनाने का फ़ैसला किया."

    फ़िल्म में अभिषेक बच्चन ने सूरजा सेन नाम के क्रांतिकारी का किरदार निभाया है जो चट्गांव विद्रोह के नेता थे.इस रोल के लिए अभिषेक के चुनाव के बारे में आशुतोष ने कहा, “जब मैंने किताब पढ़ी तो सबसे पहले मेरे ज़हन में जो नाम और चेहरा आया वो अभिषेक का था. उनके व्यक्तित्व में एक विद्रोही का अक्स दिखता है लेकिन साथ ही उनके चेहरे पर प्यारापन भी है जो मुझे लगा कि सूरजा सेन के किरदार के लिए बिल्कुल ठीक रहेगा.

    मैं लंबे समय से अभिषेक के साथ काम करना चाहता था लेकिन सही स्क्रिप्ट नहीं मिल रही थी. मैं ख़ुशकिस्मत हूं कि उसे भी ये कहानी पसंद आई और उसने फ़िल्म के लिए हां की."अभिषेक बच्चन भी कहते हैं कि वो हमेशा से आशुतोष के साथ काम करना चाहते थे. इसलिए जब ये मौका मिला तो उन्हें बहुत ख़ुशी हुई.फ़िल्म 'खेलें हम जी जान से' में दीपिका पादुकोण ने एक क्रांतिकारी की भूमिका की है.

    फ़िल्म में अभिषेक बच्चन के साथ दीपिका पाडुकोण भी मुख्य भूमिका में हैं. उनके किरदार का नाम कल्पना दत्ता है.अभिषेक मानते हैं कि दीपिका ने अपना रोल बख़ूबी निभाया है. उन्होंने कहा, “दीपिका ने अब तक सिर्फ़ चार-पांच फ़िल्में की हैं इसलिए ये क़ाबिले तारीफ़ बात है कि उन्होंने कल्पना दत्ता जैसे मुश्किल रोल को इतनी अच्छी तरह निभाया."

    लेकिन क्या ऐताहासिक विषय पर बनी ये फ़िल्म लोगों को पसंद आएगी ?अभिषेक मानते हैं कि लोगों को फ़िल्म ज़रूर पसंद आएगी. वो कहते हैं, “मेरा मानना है कि अगर फ़िल्म अच्छी है तो लोग उसे ज़रूर देखेंगे."फ़िल्म तीन दिसम्बर को सिनेमाघरों में पहुंच रही है और आशुतोष गोवारीकर को दर्शकों की प्रतिक्रिया का बेसब्री से इंतज़ार है.आशुतोष कहते हैं, “मेरे लिए दर्शकों की तारीफ़ और सराहना सबसे ज़्यादा मायने रखती है. इसके बाद अगर फ़िल्म को अवॉर्ड इत्यादि मिलते हैं तो वो बोनस है. मैं फ़िल्म के रिलीज़ और उसके बारे में लोगों की प्रतिक्रिया का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा हूं."

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