'निजी ज़िंदगी में दख़ल न दें'

'निजी ज़िंदगी में दख़ल न दें'

विनीत खरे

बीबीसी संवाददाता, मुंबई

अब्बास काज़मी बिग बॉस से बाहर हो चुके हैं

मुंबई हमले के अभियुक्त अजमल आमिर कसाब के पूर्व वकील अब्बास काज़मी हालाँकि रियलिटी टीवी सीरियल 'बिग बॉस'से बाहर हो चुके हैं, लेकिन उनके सीरियल में भाग लेने और एक मौक़े पर अपनी कमीज़ उतारने जैसे मामलों को लेकर आलोचना हो रही है.

दरअसल अब्बास काज़मी पिछले छह-सात साल से मुंबई स्थित इमामिया मस्जिद के मैनेजिंग ट्रस्टी हैं. कुछ लोगों का कहना है कि जब वो एक मस्जिद से जुड़े हुए हैं, तो उन्हे बिग बॉस जैसे सीरियल में हिस्सा नहीं लेना चाहिए था क्योंकि इससे पद की गरिमा धूमिल होती है.

जामा मस्जिद दिल्ली एडवाइज़री काउंसिल के सदस्य अब्दुल रहमान अंजारिया के मुताबिक इस्लाम में ऐसी चीज़ों की मनाही है.

शिया मामलों के जानकार और अखिल भारतीय शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना ज़हीर अब्बास रिज़वी कहते हैं कि उन्हें अब्बास काज़मी की निजी ज़िंदगी से कोई लेना देना नहीं है.

वे कहते हैं, "आप एक मामूली आदमी के लिहाज़ से कुछ भी करें, उसमें कोई हर्ज़ नहीं है, लेकिन जब आप ये कहते हैं कि मैं एक मस्जिद का मैनेजिंग ट्रस्टी हूँ, जब आप कहते हैं कि मैं शिया समुदाय का नेता हूँ, तो आपको हर काम सोच- समझ कर करना चाहिए. आप कम कपड़े पहनी हुई लड़कियों के साथ नाच रहे हैं, आपकी पत्नी बैठी हुई हैं, आप ऐसा करके किस तरह का संदेश भेज रहे हैं".

निजी ज़िंदगी

उधर अब्बास काज़मी का कहना है कि जो लोग ऐसी बातें कर रहे हैं उनका मस्जिद से कोई ताल्लुक नहीं हैं और ये बातें निजी फ़ायदों के लिए की जा रही हैं.

उनका कहना है, "मस्जिद में मेरी हैसियत धार्मिक नहीं है. मैं नमाज़ नहीं पढ़वाता हूँ. मैं धार्मिक भाषण नहीं देता हूँ. मेरा काम प्रशासनिक है, जैसे मज़दूरों को तन्ख्वाहें देना, और बिजली के बिल भरना. किसी को इस तरह की बातें करने का हक़ नहीं है. मैं बेहद शालीनता से बिग बॉस में रहा. मेरी निजी ज़िंदगी में दखल देने का किसी को हक़ नहीं है".

अब्बास काज़मी कहते हैं कि बिग बॉस में उनका समय बहुत अच्छा बीता.

वो कहते हैं, "वहाँ विभिन्न समुदाय के लोग एक ही छत के नीचे थे. राष्ट्रीय एकजुटता के लिए ये एक बहुत अच्छा संदेश था".

इससे पहले अजमल कसाब का केस हाथ में लेने पर अब्बास काज़मी की तीखी आलोचना हो चुकी है.

अब्बास काज़मी के एक मित्र ने बीबीसी को बताया कि समुदाय में कई धार्मिक नेता उनसे बेहद नाराज़ हैं. उन्होंने कहा कि उन्होंने काज़मी को इस शो में हिस्सा लेने से मना किया था लेकिन उन्होंने बात नहीं मानी.

उनका कहना था, "मैं उनके इस फ़ैसले से बेहद निराश हुआ था. मुझे बहुत लोगों के फ़ोन आ रहे हैं, और लोग बेहद ख़फ़ा हैं. जब उन्होंने कसाब का केस हाथ में लिया था, तो लोगों ने इस बात को लेकर उनका समर्थन भी किया था कि ये उनकी पेशे संबंधी ज़िम्मेदारी है".

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