जॉय मुखर्जी के रूप में एक और सितारा डूबा

अभिनेता को वेंटिलेटर पर से हटाया नहीं गया था। उनकी सेहत काफी समय से खराब चल रही थी। काजोल और तनिशा के मामा जॉय ने 1960 में पहली बार 'लव इन शिमला' में काम किया था और इसके बाद 'लव इन टोकियो', 'शागिर्द', 'बहू बेटी', 'जिद्दी', 'फिर वही दिल लाया हूं', 'एक मुसाफिर एक हसीना', 'पुरस्कार', 'इशारा' और 'हम हिन्दुस्तानी' जैसी कई फिल्मों में काम किया।
जॉय ने अभिनय के अलावा 'लव इन बॉम्बे', 'छलिया बाबू', 'सांझ की बेला' और 'उम्मीद' जैसी फिल्मों का निर्माण भी किया।


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