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    जब अवार्ड पाने के लिए कैटरीना से लेकर करण जौहर, ज़ोया अख्तर, बच्चन परिवार ने दिखाए नखरे- बड़ा खुलासा

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    बॉलीवुड इंडस्ट्री को लेकर पिछले एक महीने में इतने खुलासे हो चुके हैं कि सभी हैरान हैं। इंडस्ट्री के बाहर ही नहीं, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री के कई कलाकारों ने आवाज उठाई है और बॉलीवुड में गैंग बनाने और बाहरी कलाकारों को पीछे ढ़कलने का आरोप लगाया है। हाल ही में सीनियर जर्नलिस्ट शेखर गुप्ता ने भी बॉलीवुड सितारों को लेकर सनसनीखेज़ खुलासे किये हैं।

    अपने आलेख में पत्रकार शेखर गुप्ता ने बताया कि किस तरह अवार्ड पाने के लिए बॉलीवुड के बड़े सितारे, निर्माता, निर्देशक धमकी देते हैं और कई बार बायकॉट भी करते हैं। उन्होंने बताया है कि बच्चन परिवार से लेकर कैटरीना कैफ, करण जौहर, जोया अख्तर ने ऐन मौके पर अवार्ड पाने के लिए मनमानी शर्त रखी थी।

    दिवंगत अभिनेता ऋषि कपूर ने अपनी बॉयोग्राफी में फिल्मफेयर पुरस्कार खरीदने की बात कही थी। बॉलीवुड के कई कलाकारों ने अवार्ड शो में आना भी बंद कर दिया है। आमिर खान से कंगना रनौत सालों से अवार्ड शोज को फर्जी बताते आए हैं। वहीं, अब शेखर गुप्ता के खुलासे ने इस रंगीन दुनिया के कई पहलू सामने लाकर रख दिये हैं।

    टीआरपी का खेल है अवार्ड शोज

    टीआरपी का खेल है अवार्ड शोज

    उन्होंने लिखा, 'भारत में फिल्म अवॉर्ड्स ऑस्कर की तरह केवल पुरस्कार देने और बयान देने तक ही सीमित नहीं होते। यहां ये कई घंटों चलने वाले टीवी शो की तरह है, जिनके लिए मेजबान चैनल भुगतान करता है और फिर अपने स्पॉन्सर्स से पैसा वसूलता है। यह रेटिंग का खेल है। रेटिंग दो तरह से बढ़ाई जाती है; एक तो मंच पर टॉप फिल्मी सितारों को बुलाकर उनसे उस साल के हिट गीत पर डांस करवा कर और दूसरा दर्शकों के बीच सबसे चहेते कलाकारों को दिखाकर।'

    अवार्ड मिलेगा तो आएंगे, वर्ना बायकॉट

    अवार्ड मिलेगा तो आएंगे, वर्ना बायकॉट

    इस शो में कौन फिल्मी कलाकार मौजूद होंगे और कौन नहीं? यह मिलने वाले पुरस्कार पर निर्भर करता है। अगर उन्हें पुरस्कार मिल रहा है तो वह आएंगे और उनका पूरा गुट भी आएगा लेकिन अगर पुरस्कार नहीं मिलते तो एक साथ सभी मिलकर पुरस्कार समारोह का बायकॉट कर देते हैं।

    बच्चन परिवार ने किया था बायकॉट

    बच्चन परिवार ने किया था बायकॉट

    बच्चन परिवार से संबंधित अपने एक अनुभव के बारे में उन्होंने लिखा, 'मुझे तारीख ठीक से याद नहीं है। मेरा पहला अनुभव शायद 2004 का है। उस वक्त बच्चन परिवार ने एक साथ कुछ मतभेदों के चलते पुरस्कार समारोह का बहिष्कार किया था।'

    करण जौहर ने ऐन मौके पर दी थी धमकी

    करण जौहर ने ऐन मौके पर दी थी धमकी

    2011 के अवार्ड शो पर उन्होंने लिखा, उस साल फिल्म 'माय नेम इज खान' सबसे बड़ी हिट फिल्म थी लेकिन स्क्रीन अवॉर्ड में इसे किसी भी श्रेणी में नामित नहीं किया गया। उस वक्त जूरी के अध्यक्ष जाने माने कलाकार अमोल पालेकर थे। इस समारोह में शाहरुख को कांट्रैक्ट के तहत मंच पर होस्ट की भूमिका निभानी थी। समारोह के तीन दिन पहले ही मुझे बायकॉट करने की धमकियां मिलने लगीं।

    माई नेम इज खान की जगह उड़ान को अवार्ड क्यों!

    माई नेम इज खान की जगह उड़ान को अवार्ड क्यों!

    "करण जौहर मुझसे शिकायत कर रहे थे कि आखिर जूरी को उनकी फिल्म किसी भी अवॉर्ड के काबिल कैसे नहीं लगी? उन्होंने अनुराग कश्यप की मामूली सी फिल्म 'उड़ान' को चुनने की हिम्मत कैसे की? फिर हमने धैर्य रखा और जब व्यूअर्स चॉइस अवॉर्ड की घोषणा हुई तब हमारी सांस में सांस आई। वह अवॉर्ड माई नेम इज खान के पक्ष में था। हम भी संतुष्ट थे क्योंकि वह अवार्ड हमारी ज्यूरी नहीं, बल्कि दर्शक चुनते हैं। हमारी प्रक्रिया साफ थी।"

    'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा' ने किया था बहिष्कार

    'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा' ने किया था बहिष्कार

    उन्होंने लिखा, वर्ष 2012 में विद्या बालन की 'द डर्टी पिक्चर' और मल्टीस्टारर 'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा' को संयुक्त रूप से सर्वश्रेष्ठ फिल्म का स्क्रीन अवॉर्ड दिया गया। यहां तक तो ठीक था लेकिन इन दोनों फिल्मों में सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का अवॉर्ड जोया अख्तर को छोड़कर मिलन लूथरा को घोषित कर दिया गया। इसके बाद 'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा' के सभी कलाकारों और कर्मचारियों ने अवॉर्ड शो का बहिष्कार करने की घोषणा कर दी। हम फिर परेशानी में थे कि अब जब सर्वश्रेष्ठ फिल्म के अवॉर्ड को लेने के लिए कोई मंच पर ही नहीं आएगा तो समारोह कैसा है?

    कोई भी नहीं आया अवार्ड लेने

    कोई भी नहीं आया अवार्ड लेने

    "फिर इस समारोह में फरहान आए, लेकिन उन्होंने कहा कि वह सिर्फ आदर जताने के लिए आए हैं लेकिन पुरस्कार ग्रहण नहीं करेंगे और कुछ मिनट के बाद ही वह चले भी गए। उस फिल्म की निर्माता इरोस नाउ की कर्ता धर्ता कृषिका लुल्ला उस समय वहां मौजूद थीं। हमने उनसे गुजारिश की लेकिन वह तो एकदम सन्न रह गईं। आखिर सभी कलाकारों के रहते इस पुरस्कार को वह कैसे ले सकती हैं। अंत में हमें अपने ही एक कर्मचारी को फिल्म की ओर से अवॉर्ड लेने के लिए भेजना पड़ा।"

    ऋतिक रोशन ने भी दिखाए थे नखरे

    ऋतिक रोशन ने भी दिखाए थे नखरे

    पत्रकार ने लिखा, 'यह बात वर्ष 2007 की है जब ऋतिक रोशन को फिल्म 'कृष' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिलना था। साथ ही वह होस्ट भी करने वाले थे लेकिन, शो के एक घंटे पहले ही फोन आया कि वह मंच पर जाकर अपनी प्रस्तुति तो देंगे लेकिन अवॉर्ड नहीं लेंगे। क्योंकि जूरी ने उनके पिता को अवार्ड नहीं दिया था। वह उस फिल्म के निर्देशक थे। खूब मनाने के बाद ऋतिक अवॉर्ड के लिए तो मान गए लेकिन पुरस्कारों के बाद होने वाली पार्टी का उन्होंने बहिष्कार कर दिया।'

    कैटरीना कैफ ने बहाए थे आंसू

    कैटरीना कैफ ने बहाए थे आंसू

    साल 2012 के अनुभव को याद करते हुए उन्होंने लिखा, "कैटरीना ने मंच पर कार्यक्रम पेश करने का कॉट्रैक्ट करके और पूरी फीस लेने के बावजूद शो से कुछ मिनट पहले ही बखेड़ा खड़ा कर दिया। उनका कहना यही था कि उन्हें यहां कोई अवॉर्ड नहीं दिया गया है। मैं उनकी वैनिटी वैन में गया। वह शो के लिए सज धजकर तैयार थीं। वह अचानक से चिल्लाने लगीं कि आखिर उन्हें हमेशा क्यों बुलाया जाता है जबकि कोई अवॉर्ड दिया ही नहीं जाता? मैंने उन्हें समझाया कि बात सिर्फ प्रस्तुति देने की हुई थी, अवॉर्ड की नहीं। इसके बाद उनकी आंखों से आंसू बहने लगे। उनका मेकअप निकलने लगा। फिर हमने एक लोकप्रिय पुरस्कार की नई श्रेणी बनाई।"

    सोनू निगम ने कंगना का किया सपोर्ट- कहा,'यदि उसने कहा कि महेश भट्ट ने उस पर चप्पल फेंकी, तो सच होगा'सोनू निगम ने कंगना का किया सपोर्ट- कहा,'यदि उसने कहा कि महेश भट्ट ने उस पर चप्पल फेंकी, तो सच होगा'

    English summary
    Bollywood journalist exposes bollywood stars; tantrums Katrina kaif, Karan Johar, Zoya akhtar and many others had done for getting awards.
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