मद्रास कैफे एक स्पेशल फिल्म है- जॉन अब्राहम
मद्रास कैफे फिल्म को लेकर तमिलनाडू में विवाद जोर पकड़ता जा रहा है। फिल्म को एंटी तमिल बताकर कहा जा रहा है कि फिल्म में तमिल की संगठन को लेकर काफी कुछ गलत दिखाया गया है। इस वजह से फिल्म को तमिलनाडू में रिलीज ना करने का फैसला किया गया है। तमिलनाडू की संगठन ने फिल्म को देखने के बाद भी फिल्म को सीधे तमिल विरोधी कहा है। जहां तक जॉन की बात है तो उन्होंने अपने इंटरव्यू में साफ साफ कहा है कि मद्रास कैफे किसी भी तरह से एंटी तमिल नहीं है। लेकिन अगर लोगों को ऐसा लगता है तो उसमें कुछ किया नहीं जा सकता है। ये एक स्पेशल फिल्म है जिसमें उन्होंने कुछ रियल किरदारों को दिखाया है।
इसके अलावा जॉन अब्राहम ने ये पूछने पर कि फोर्स और शूटआउट जैसी फिल्मों में एक्शन हीरो के किरदार निभाने के बाद अब मद्रास कैफे फिल्म में एक नॉर्मल मिलिट्री ऑफीसर का किरदार निभाने में उन्हें किसी तरह का कोई रिस्क नहीं लगा तो इसपर जॉन अब्राहम ने कहा कि मद्रास कैफे में लार्जर दैन लाइफ कैरेक्टर नहीं है। बल्कि फिल्म में एक सिंपल से मिलिट्री ऑफीसर का किरदार दिखाया गया है। शुजीत सरकार शुरुआत से ही काफी क्लियर थे और उन्होंने पहले ही ये कह दिया था कि इस फिल्म में अगर लोग शूटआउट और फोर्स के हीरो को फिल्म में देखने की कोशिश करेंगे तो ऐसा नहीं होगा। उन्हें इस फिल्म में कुछ अलग ही नज़र आएगा। इसमें उन्हें बिना शर्ट के जॉन सड़कों पर दौड़ता हुआ नहीं नज़र आएगा।
जॉन ने बताया कि मद्रास कैफे एक कमर्शियल फिल्म है ये कोई डॉक्यूमेंट्री नहीं है। इसमें एक सच्ची कहानी दिखाई गयी है। हमें लगता है कि 80वीं 90वीं शताब्दी में काफी कुछ ऐसा हुआ जिसने कि हमारे इतिहास को बदल कर रख दिया। लेकिन उन सबके बारे में हमारे इतिहास में कुछ नहीं लिखा गया है। तो हम चाहते हैं कि उनमें से कुछ बातों को और कुछ इवेंट्स के बारे में आज की यंग जेनरेशन जाने और फिल्म को देखने के बाद बाहर जाकर इस बारे में डिसकस करे। भले ही हमारी फिल्म फिक्शन है लेकिन फिल्म के कई कैरेक्टर्स रियल लोगों से इंसपायर है।


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