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    रहमान राही को ज्ञानपीठ पुरस्कार

    By Staff
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    कश्मीरी भाषा के कवि, रहमान राही को ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. ऐसा पहली बार है जब कश्मीरी साहित्यकार को यह पुरस्कार मिला है.

    गुरुवार को भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नई दिल्ली में 40वें ज्ञानपीठ पुरस्कार के समारोह में कश्मीरी कवि रहमान राही को यह सम्मान दिया.

    ऐसा पहली बार हुआ है जब कश्मीरी भाषा के किसी कवि या साहित्यकार को ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला है.

    रहमान पिछले पाँच दशकों से कश्मीरी भाषा में अपना साहित्यिक सृजन करते आए हैं और इस दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण और विशिष्ट रचनाएं लिखी हैं.

    प्रधानमंत्री ने इस मौके पर रहमान राही के साहित्यिक योगदान की सराहना करते हुए कहा कि रहमान को मिला यह पुरस्कार भारतीय साहित्य को उनके योगदान के लिए दिया गया है.

    रहमान राही लगभग 700 वर्ष पुरानी कश्मीरी भाषा में अपना साहित्यिक योगदान देते रहे हैं. रहमान कवि हैं और अपनी कविताओं के माध्यम से भाषा और साहित्य को आगे बढ़ाते रहे हैं.

    मनमोहन सिंह ने कहा कि इस बात पर भी ध्यान देना होगा कि जिन लोगों के काम को ज्ञानपीठ पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया है, उनके काम की पहुँच अन्य भारतीय भाषाओं के लोगों तक भी हो ताकि ज़्यादा लोग उनके साहित्यिक योगदान से परिचित हों और उसका लाभ उठा सकें.

    ज्ञानपीठ पुरस्कारों की शुरुआत भारत के एक वरिष्ठ उद्योगपति शांतिप्रसाद जैन द्वारा साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में काम करने के लिए बनाए गए एक ट्रस्ट के माध्यम से की गई थी.

    इस ट्रस्ट ने 1960 के दशक में ज्ञानपीठ पुरस्कार देने की परंपरा की शुरुआत की. भारत में भारतीय भाषाओं के ज़रिए साहित्य में विशिष्ट योगदान के लिए यह पुरस्कार दिया जाता है.

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