जावेद अख्तर ने उड़ाई PAK एक्ट्रेस बुशरा अंसारी की धज्जियां, मुंह को चुल्लु भर पानी से धोने लायक भी नहीं छोड़ा

Javed Akhtar On Bushra Ansari: जावेद अख्तर की भाषा और सरलता से बड़ी से बड़ी बात कह देने के कायदे का हर कोई दीवाना है। अबकि बार जावेद अख्तर ने पाकिस्तानी एक्ट्रेस बुशरा अंसारी को ऐसे जवाब दिया है कि वो अपना मुंह को चुल्लु भर पानी से साफ करने लायक भी नहीं बची हैं।
लल्लनटॉप के साथ बात करते हुए जावेद अख्तर ने बुशरा अंसारी के 'मुस्लिमों को घर न मिलने' वाली टिप्पणी का जवाब दिया। वो कहते हैं, 'वह कौन होती हैं मुझे बताने वाली कि कब बोलना है और कब नहीं। आपको (बुशरा अंसारी) ये हक किसने दिया कि वो मुझे बताएं कि मुझे कब बोलना है और कब नहीं'।
जावेद अख्तर ने पाकिस्तानी एक्ट्रेस के कमेंट पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि करीबन 25 साल पहले उनकी पत्नी शबाना आजमी मुंबई में एक घर खरीदना चाहती थीं। ब्रोकर ने साफ कह दिया था कि मकान मालिक मुस्लिमों को घर नहीं देते हैं, जिसकी वजह से उन्हें घर नहीं मिला था। लेखक आगे कहते हैं कि ये दुर्भाग्यपूर्ण था कि उस मकान मालिक ने शबाना आजमी को एक इंसान के तौर पर नहीं बल्कि एक मुसलमान के तौर पर देखा था, लेकिन उसके इस फैसले के पीछे एक बहुत ही इमोशनल वजह थी।
Lallantop wasn't ready for this!
— Keh Ke Peheno (@coolfunnytshirt) May 30, 2025
Javed Akhtar explains why they dont rent out their houses to muslims.. pic.twitter.com/jWUDdFQHKv
वो कहते हैं, 'मालिक ने फ्लैट बेचने से मना कर दिया क्योंकि उनके माता-पिता पाकिस्तान के सिंध से थे और उन्हें रातोंरात अपना देश छोड़ने के लिए, पलायन करने के लिए मजबूर किया गया था। उन्हें बाहर निकाल दिया गया था। उनकी जमीन, संपत्ति, सामाजिक सम्मान, पेशा, सब कुछ उनसे छीन लिया गया था। वे भारत में शरणार्थी (रिफ्यूजी) के रूप में आए थे। उनके मन में अभी भी वो पीड़ा था, वो उस तकलीफ को, उस कड़वाहट को भूल नहीं पाए थे'।
उन्होंने आगे बताया कि विभाजन के बाद पाकिस्तान से भागे कई सिंधी हिंदुओं को अपनी जिंदगी फिर से शुरू करनी पड़ी। वो कहते हैं, 'ये वही सिंधी, गरीब सिंधी हैं जो सड़कों पर कपड़े बेचते थे, छोले बेचते थे। अपनी मेहनत से उन्होंने अपने लिए एक स्थान बनाया। लेकिन उनके साथ क्या हुआ? वह कड़वाहट अभी भी उनके भीतर जीवित है'।
जावेद अख्तर कहते हैं कि सिंधी लोगों को रातोंरात पाकिस्तानियों ने अपने ही देश से निकाल दिया जिसके बाद भारत में उन्हें एक रिफ्यूजी के तौर पर रहना पड़ा और एक रिफ्यूजी की जिंदगी बड़ी दर्दनाक थी। उन्हें कैंप में लाखों लोगों के साथ रहना पड़ता था और कैंप में खाने तक के लिए लंबी-लंबी लाइन में खड़ा रहना पड़ता था।


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