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    तबू और विशाल भारद्वाज से इरफान खान की वो मुलाकात, बांटा था कैंसर का दर्द, दिल तोड़ देंगी डीटेल्स

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    इरफान खान, 29 अप्रैल 2020 को दुनिया से अलविदा कर चले गए। अब उनके निधन के 13 दिन बाद, उनके दोस्त विशाल भारद्वाज ने एक स्क्रीनप्ले, इरफान और मैं (Irrfan and I) में उनकी कुछ आखिरी यादों का ज़िक्र किया है।

    इस स्क्रीनप्ले को टाइम्स ऑफ इंडिया ने प्रकाशित किया है। इसे आप pdf में भी पढ़ सकते हैं। अब इसी का एक हिस्सा हम आपके लिए यहां लेकर आए हैं।

    ये हिस्सा है इरफान खान की तबू और विशाल भारद्वाज से मुलाकात का। मुलाकात तब जब इरफान ने दुनिया से अपने कैंसर पीड़ित होने की खबर शेयर की थी।

    इसके बाद इरफान खान से मिलने तबू और विशाल भारद्वाज पहुंचे। इस मुलाकात की डीटेल्स इतनी दुखद है कि आपका दिल भर आएगा।

    इरफान से मिलने गए

    इरफान से मिलने गए

    साल 2018 | तबू और मैं, इरफान के घर के बाहर खड़े हैं। तबू मुझे घंटी बजाने देती है। हम एक दूसरे को घबराहट से देख रहे हैं। ये पहली बार है जब मैं और तबू, इरफान से मिलने जा रहे हैं, जब से कुछ महीनों पहले, उसके कैंसर की खबर मिली है।

    कमरे में जाकर बैठे

    कमरे में जाकर बैठे

    थोड़ी देर बाद मैं और तबू एक छोटे से कमरे में चुपचाप जाकर बैठ गए। ये वही कमरा है, जहां इरफान अपनी स्क्रिप्ट वगैरह सुनता है और बाकी मीटिंग करता है।

    यूं आए इरफान

    यूं आए इरफान

    इरफान, सफेद कुर्ता पजामा पहने और क्रीम रंग की शॉल ओढ़े कमरे में आता है। हम गले मिलते हैं और ना जाने कब तक गले लगे रहते हैं। इरफान अपने कैंसर के इलाज की कहानियां बताने की शुरूआत करता है। जैसे कि कोई स्क्रिप्ट सुना रहा है। मैं और तबू, हंसते हंसते थक गए।

    मज़ाक की बातें

    मज़ाक की बातें

    वो अपने डॉक्टरों की नकल उतारता है और उसकी एक अजीब सी आदत का ज़िक्र करता है। तभी सुतापा कमरे में आती है और इरफान को डॉक्टर का मज़ाक उड़ाते देख डांटती है। धीरे धीरे मज़ाक की बातें, एक गहरी बातचीत में और फिर उदासी में बदल जाती है।

    कितना कुछ हो रहा है

    कितना कुछ हो रहा है

    इरफान खिड़की से बाहर देखते हुए कहता है - बदन में बहुत सारी तरह की स्क्रिप्ट एक साथ चल रही हैं। कभी कोई थ्रिलर आगे आ जाता है तो कभी कोई कॉमेडी। कभी टाइम के खिलाफ ही रेस शुरू हो जाती है तो कभी लगता है कि समय ही धीमा पड़ गया है। कितनी भी ताकत से ढकेलो, हिलता ही नहीं है।

    बस दर्द ज़्यादा है

    बस दर्द ज़्यादा है

    इरफान हमें देखता है और मुस्कुरा देता है। वो आगे कहता है - कमाल का एक्सपीरियंस हो रहा है। बस एक ही चीज़ है - ये साला दर्द। जब होता है, तो झेला नहीं जाता है।

    आखिरी पल

    आखिरी पल

    गौरतलब है कि इरफान खान के नाम लिखी आखिरी यादों की फिल्म में विशाल भारद्वाज ने इरफान के उन सीन का ज़िक्र किया जो उनकी आंखों के आगे नाचते रहे। इनमें तबू और इरफान का मकबूल का सीन भी शामिल है।

    गहरी फिल्में

    गहरी फिल्में

    इरफान, अपनी पिस्तौल से तबू के आंसू पोंछ रहा है। इरफान, कैमरे की लेंस की तरफ झुकता है और कहता है - चले भी आओ की गुलशन का कारोबार चले। इरफान तबू को बांहों में पकड़े हुए है और वो पूछती है - हमारा इश्क तो पाक था ना मियां।

    विदा देने के बाद

    विदा देने के बाद

    इरफान खान की मौत से विशाल भारद्वाज बुरी तरह टूट गए। उन्हें ये विश्वास ही नहीं हुआ कि इरफान अब हमारे बीच नहीं रहे। इरफान को विदा देने के बाद पहली बार मीडिया से बात करते हुए विशाल भारद्वाज ने कहा था ऐसा लग रहा है कि मेरे अंदर से कुछ खाली हो गया है।

    सुकून में रहें

    सुकून में रहें

    गौरतलब है कि इरफान खान दो साल तक कैंसर से लड़ने के बाद 29 अप्रैल 2020 को दुनिया को अलविदा कह गए। उनका जाना, हर किसी को इतना बड़ा सदमा दे गया कि अभी भी लोग उन्हें याद कर अपनी आंखें नम कर रहे हैं। हमारी दुआ है कि इरफान जहां भी हों, सुकून में हों।

    English summary
    After knowing about Irrfan Khan’s cancer, Tabu and Vishal Bhardwaj went to meet him. Details of this meeting are heartbreaking. Irrfan talked about his pain and agony.
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