टीवी हुआ पुराना, चलते-फिरते मनोरंजन का ज़माना
आज टीवी की बजाए लैपटॉप या मोबाइल पर मनोरंजन पसंद कर रहे हैं लोग.
एक वक़्त था जब पूरा परिवार टीवी के सामने बैठता था और सभी अपने सीरियल का इंतज़ार करते थे या फिर फ़िल्म देखने सिनेमा हॉल जाते थे. लेकिन अब इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं रही क्योंकि मनोरंजन अब चलते-फिरते ही हो जाता है.
आप अपने वक़्त के हिसाब से अपने मोबाइल या लैपटॉप पर कुछ भी देख सकते हैं.
इंटरनेट पर बहुत से वेब सिरीज़ और छोटे-छोटे वीडियोज़ आ रहे हैं जो मोबाइल पर देखने के लिए बनाए जाते हैं.
हाल के समय में जो वेब सिरीज़ मशहूर हुईं वो हैं - 'लिटिल थिंग्स', 'सेक्स चैट विद पप्पू एंड पापा', 'गर्ल इन द सिटी', 'द अदर लव स्टोरी', 'पर्मानेंट रूम मेट्स', 'बेक्ड' और 'द ट्रिप'.
इन कहानियों के किरदार ज़्यादातर युवा हैं .
टी वी और इंटरनेट
'लिटिल थिंग्स' बनाने वाली 'डाइस मीडिया' और 'फ़िल्टर कॉपी' के अनिरुद्ध पंडिता ने बीबीसी से बातचीत में बताया कि भविष्य का मनोरंजन अब इंटरनेट पर होगा.
उन्होंने कहा, "अब आपके पास टीवी है, लैपटॉप है, मोबाइल है तो हर किसी के पास एक तरह से अपना टीवी है. आजकल की युवा पीढ़ी टीवी के सामने नहीं मिलेगी."
वो कहते हैं, "मैंने युवाओं से बात की तो पता चला कि उन्हें नहीं पता कि टीवी पर क्या है. ज़्यादातर टीवी सीरियल महिलाओं के लिए हैं जिनकी उम्र तीस से अधिक है. आज की पीढ़ी आधे-आधे घंटे नहीं बैठेगी. उन्हें छोटे वीडियोज़ पसंद हैं."
"आजकल मनोरंजन फ़ोन के ज़रिए, वीडियो चैनल और सोशल मीडिया के ज़रिए होता है."
वेब सिरीज़ की कमाई
जैसे-जैसे माध्यम बदलता है तो कमाई का मॉडल और विज्ञापन का तरीका भी बदलता है- विज्ञापन बनाने का तरीका और उससे कमाई का तरीका भी.
इंटरनेट पर विज्ञापन आसान है, इसमें बचत होती है और एक ब्रैंड भी बनता है.
सितारे अब सिर्फ टीवी या फ़िल्मों के ज़रिए नहीं बनते, इंटरनेट पर भी सितारे बनते हैं. जैसे डाइस मीडिया के 'लिटिल थिंग्स' और बिंदास के 'गर्ल इन द सिटी' में मिथिला पालकर.
इन्हें इतनी लोकप्रियता मिल रही है कि विदेश में भी लोग इन्हें पहचानने लगे हैं.
मिथिला कहती हैं, "क्योंकि इंटरनेट पर अपनी प्रतिक्रिया देना आसान है तो लोग हमें अपने क़रीब समझते हैं. लोग आकर मुझसे बात करते हैं. इंटरनेट माध्यम में कोई बंधन नहीं, ना भाषा का, ना वक़्त का और ना जगह का."
'लिटिल थिंग्स' और 'गर्ल इन द सिटी' से मिथिला को इतनी शोहरत मिली कि अब वो मराठी फ़िल्म भी कर रही हैं और ऐसे लोग भी उनकी फ़िल्म के लिए उत्सुक हैं जो मराठी नहीं जानते.
लिटिल थिंग्स के लेखक और मुख्य कलाकार ध्रुव के मुताबिक, "लिटिल थिंग्स' की कहानी आपकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी के बारे में है. लोगों को असल ज़िंदगी के क़रीब छोटे-छोटे लम्हों से बनी कहानी पसंद आती है. लोग इसे समझते हैं."
सेंसरशिप और इंटरनेट
क्योंकि इंटरनेट के माध्यम पर कोई लगाम नहीं तो बोल्ड कहानियाँ भी आती हैं और कुछ गाली-गलौच वाले वीडियोज़ भी.
अनिरुद्ध पंडिता मानते हैं, "हां यह सच है कि इस माध्यम में आज़ादी बहुत है, लेकिन आपको उसकी ज़िम्मेदारी लेनी होगी."
वो कहते हैं, "आप बेशक कितनी गाली-गलौच वाले वीडियोज़ ले आओ या फिर एडल्ट सीन ले आओ. अगर कहानी या वीडियो अच्छे हैं तो ही बात बनेगी. आख़िर ब्रैंड का सवाल है."
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