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नासिरा शर्मा को इंदु शर्मा कथा सम्मान

By Staff

ब्रिटिश सरकार के आंतरिक सुरक्षा राज्य मंत्री टोनी मैकनल्टी ने शुक्रवार की शाम नासिरा शर्मा को ये सम्मान किया.

ब्रिटिश संसद के उच्च सदन हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स में हुए एक समारोह में ब्रिटेन के हिंदी लेखकों के लिए स्थापित पद्मानंद साहित्य सम्मान यॉर्क की उषा वर्मा को दिया गया.

कथा यूके ने यह सम्मान समारोह आयोजित कराया था. इस समारोह में ब्रिटेन के आंतरिक सुरक्षा राज्य मंत्री टोनी मैकनल्टी ने हिंदी में अपने भाषण की शुरूआत की.

मैकनल्टी कहा, "राजा और रानी, मंत्री और प्रधानमंत्री भुला दिए जाते हैं, लेकिन साहित्य को लोग याद रखते हैं. आज हम शेक्सपीयर को ज़रूर जानते हैं लेकिन यह नहीं जानते कि उस समय के राजा या प्रधानमंत्री कौन थे."

उन्होंने कहा कि लेखकों और दार्शनिकों ने हमारे इतिहास और सभ्यता का निर्माण किया. इस मौक़े पर मौजूद लेबर पार्टी की काउंसलर ज़कीया ज़ुबैरी ने इस बात पर चिंता प्रकट की कि एशियाई समाज की नई पीढ़ी अपनी मातृ भाषाओं से लगातार दूर होती जा रही है.

सोच

उन्होंने कहा कि यह एशियाई लोगों की घर-घर की कहानी है कि उनके बच्चे लगातार उनकी संस्कृति से दूर जा रहे हैं. लेखकों को इस बारे में भी सोचना चाहिए.

राजा और रानी, मंत्री और प्रधानमंत्री भुला दिए जाते हैं, लेकिन साहित्य को लोग याद रखते हैं. आज हम शेक्सपीयर को ज़रूर जानते हैं लेकिन यह नहीं जानते कि उस समय के राजा या प्रधानमंत्री कौन थे
साक्षात्कार और रचना समय के संपादक हरि भटनागर ने नासिरा शर्मा की पुरस्कृत कृति कुइयां जान का परिचय देते हुए कहा कि यह कृति हिंदी उपन्यासों की परंपरा की एक महत्वपूर्ण कड़ी है.

लंदन में भारतीय उच्चायोग के हिंदी और संस्कृति अधिकारी राकेश दुबे ने उषा वर्मा के पुरस्कृत कथा संग्रह कारावास का परिचय दिया.

इस सम्मान समारोह में सनराइज़ रेडियो के प्रसारक रवि शर्मा ने कुइयां जान के अंशों का अभिनय पाठ किया. अपने आभार भाषण में नासिरा शर्मा ने कहा, "कुइयां जान हमारी परंपरा और रिश्तों की प्यास की बात करती है."

कथा यूके के महासचिव तेजेंद्र शर्मा ने कहा कि ब्रिटिश संसद में हिंदी की बात करके हम सच्चे अर्थों में विश्व बंधुत्व की ओर बढ़ रहे हैं.

उन्होंने टोनी मैकनल्टी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने हिंदी को स्वीकृति देकर ब्रिटेन की लोकतांत्रिक परंपरा को आगे बढ़ाया है.

इस अवसर पर उन्होंने ब्रिटेन में बसे हिंदी प्रेमियों के लिए, भारतीय प्रकाशकों के सहयोग से एक बुक क्लब शुरू करने की सूचना दी. इसके माध्यम से यहाँ के हिंदी पाठकों को श्रेष्ठ हिंदी पुस्तकें घर बैठे उपलब्ध हो सकेंगी

कार्यक्रम का संचालन डा. निखिल कौशिक ने किया. कार्यक्रम में शामिल होने के लिये वेल्स, यॉर्क, बर्मिंघम और अन्य दूर दराज़ के इलाक़ों से मीडिया, साहित्य, उद्योग और सांस्कृतिक क्षेत्र के प्रतिनिधि पहुँचे.

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