'रैंप पर बिकनी पहनना पसंद नहीं'

यही कारण है कि तैराकी की पोशाक और लिंगरी की एक बड़ी रेंज बिना प्रदर्शन रखी रह जाती हैं। इसी वजह से भारतीय डिजाइनर इन वस्त्रों के लिए मेहनत भी नहीं करना चाहते। इन वस्त्र निर्माताओं को विज्ञापन के लिए विदेशी या फिर नए मॉडलों का सहारा लेना पड़ता है।
मॉडल दिपन्निता शर्मा कहती हैं, "मुझे बिकनी पहनने से नहीं, लेकिन इसे पहनकर रैंप पर चलने से परहेज है। मेरे घरवालों को यह ठीक नहीं लगेगा। मैं जानती हूं कि ऐसे कपड़ों में मुझे देखना परिवारवालों को अच्छा नहीं लगेगा।"
मॉडल लक्ष्मी राणा इसे निजी पसंद का मामला बताती हैं। वह कहती हैं कि भारतीय परिवेश में रहने वाली मॉडलों के लिए ऐसा कर पाना मुश्किल है। मॉडल उर्वशी शर्मा ने तो यहां तक कह दिया कि बिकनी भारतीय संस्कृति के खिलाफ है।
चर्चित मॉडल नोयनिका चटर्जी के अनुसार 'कामसूत्र' सहित प्राचीन काल से ही प्रेम को जन्म देने वाले इस देश में रहने वाले लोग असल में आज भी रूढ़िवादी ख्याल रखते हैं। लंदन में रहने वाली भारतीय मॉडल जॉन मैथ्यू को स्विम सूट पहनने में कोई परेशानी नहीं है।
विज्ञापन गुरु प्रहलाद कक्कड़ के अनुसार लिंजरी ब्रांड के लिए भारतीय मॉडलों का शरीर फिट ही नहीं है, इसलिए वे इसके लिए तैयार नहीं हो पातीं। बाकी सारी बातें बेकार हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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