सोनू सूद के 6 ऑफिस पर इनकम टैक्स विभाग का छापा, अकाउंट में मिली गड़बड़ी, 130 करोड़ की संपत्ति
एक्टर सोनू सूद के ऑफिस पर इनकम टैक्स विभाग ने छापा मारा है और उनके अकाउंट बुक में काफी गड़बड़ी सामने आई है। सूत्रों की मानें तो पहला छापा, सोनू सूद के मुंबई स्थित दफ्तर पर पड़ा। इसके बाद छह दफ्तरों पर छापे मारे गए जिनमें लखनऊ का भी एक ऑफिस शामिल है। सोनू सूद के ऑफिस में अभी भी जांच पड़ताल जारी है।
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दिलचस्प ये है कि ये छापा ठीक उस घटना के बाद पड़ा है जहां दिल्ली सरकार ने सोनू सूद को अपने एक अभियान का ब्रांड एंबेज़डर बनाया है और इसके बाद खबरें उड़ीं कि सोनू सूद जल्दी ही अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी में शामिल हो सकते हैं।

हालांकि कोरोना काल के दौरान बेहद बड़े स्तर पर राहत कार्य चलाने वाले अभिनेता सोनू सूद ने पहले भी कई बार साफ किया है कि राजनीति में उतरने का उनका बिल्कुल मन नहीं है। भले ही कई ऐसे एक्टर्स हैं जिनका मानना है कि सोनू सूद को इस देश का प्रधानमंत्री होना चाहिए। लेकिन इन सारी तारीफों को दरकिनार करते हुए सोनू सूद ने हमेशा साफ किया है कि राजनीति में उनकी दिलचस्पी नहीं है।
अब सोनू सूद के ऑफिस पर इनकम टैक्स के छापे का कारण क्या है, ये तो फिलहाल स्पष्ट नहीं है लेकिन कोरोना के दौरान भी लोग ये जानना चाहते थे कि सोनू सूद जितनी मदद लोगों की कर रहे हैं उसके लिए पैसे कहां से जुटा रहे हैं।

कितनी है कुल संपत्ति
रिपोर्ट्स की मानें तो सोनू सूद की कुल संपत्ति करीब 17 मिलियन डॉलर के आसपास है। यानि कि वो कुल 130 करोड़ के मालिक हैं। सोनू सूद होटल्स के एक चेन के मालिक हैं और उनके पास एड की कमाई है। वहीं कई फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय होने के कारण उनके पास काम की कोई कमी नहीं है। बॉलीवुड में जहां सोनू सूद छेदी सिंह के किरदार के साथ दबंग में छा गए और यहीं से उनका करियर भी पटरी पर दौड़ पड़ा। वहीं साउथ की फिल्मों में भी सोनू सूद एक बड़ा और सफल नाम बन चुके हैं।

करते गए ज़रूरतमंदों की मदद
सोनू सूद ने अपने नेक काम की शुरूआत लॉकडाउन के साथ ही की थी जब उन्होंने अपने होटल को पैरामेडिकल स्टाफ के रहने के लिए मुफ्त में उपलब्ध कराया। इसके बाद उन्होंने गरीबों को खाना बांटने की शुरूआत की। इसके बाद सोनू सूद ने कुछ बसों में सरकार से परमिशन लेने के बाद प्रवासी मज़दूरों का एक जत्था अपने अपने घर भेजने की कोशिश की। लेकिन धीरे धीरे लोग उनसे मदद मांगते गए।

केवल पब्लिसिटी स्टंट?
सोनू सूद पर इसके बाद लोगों ने इल्ज़ाम लगाया कि वो केवल इमेज बिल्डिंग के लिए इस आपदा को अपने लिए अवसर में बदल रहे हैं। यही कारण है कि उन्हें ज़्यादा फर्क नहीं पड़ता कि किसको सच में मदद मिल रही है या नहीं। लेकिन जितने मदद के हाथ सोनू सूद की तरफ बढ़े, उनके पास थक कर बैठने का और आलोचनाओं का खंडन करने का भी समय नहीं था। इसलिए सोनू सूद वही काम करते गए जो वो पिछले एक साल से कर रहे हैं - लोगों की मदद।

अभी भी जारी है काम
गौरतलब है कि सोनू सूद की इस संस्था में उनके बेटे और पत्नी भी साथ दिया। सोनू सूद पूरे देश में ऑक्सीजन से लेकर बेड सप्लाई करने की कोशिश करते दिखे जिससे कि ऑक्सीजन की कमी के चलते कोई अपना दम ना तोड़े। वहीं इस समय देश में सोनू सूद 16 ऑक्सीजन प्लांट लगवा रहे हैं।

इतिहास में दर्ज हो चुके हैं सोनू सूद
गौरतलब है कि सोनू सूद ने जिस युद्ध स्तर पर काम किया लोग उन्हें सच का सुपरहीरो मानने लगे और उन्हें मसीहा बुलाने लगे। इतनी मदद तो भगवान भी नहीं कर सकता जितनी तेज़ी से सोनू सूद ने लोगों को मदद दिलवाई। हर किसी का मानना है कि जब इतिहास में भारत का ये काला अध्याय दर्ज होगा तब उसमें सोनू सूद की सूझ बूझ और दरियादिली पर भी एक चैप्टर ज़रूर होना चाहिए।


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