"मैं लकी था..जब फिल्मों में आया तब मीडिया विनम्र और दर्शक दयालु थे"
सैफ अली खान ने कुछ दिनों पहले नेपोटिज्म पर एक खुला खत लिखा था और अपने विचारों को साझा किया था। उन्होंने इस खत में समझाने की कोशिश की थी कि नेपोटिज्म फिल्म इंडस्ट्री में कितना हावी है। इसके बाद कंगना ने भी एक ओपन लेटर लिखा था।
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हाल में एक इवेंट में उन्होंने बॉलीवुड के अपने सफर के बारे में बताया। सैफ ने कहा कि " मेरे पिता ने कहा था कि तुम चाहो तो भूल जाओ तो कि तुम्हें विरासत मं क्या मिला है और तुम जितना सोच रहे हो उतने पैसे नहीं हैं मेरे पास। दिल्ली में पलने बढ़ने के दौरान कई रईस लोगों को भी देखा। उन्होंने कहा कि तुम उन जैसे नहीं हो

सैफ के पिता मंसुर अली खान पटौदी ने कहा कि "मैं तुम्हें एक से बढ़कर एक अच्छे स्कूल और कॉलेज में दाखिला कराऊंगा लेकिन बाकी तुम्हारे ऊपर है।" साथ ही सैफ ने ये भी कहा कि "मैं भयभीत हो गया। मैं ये नहीं चाहता था।एक बार बीआर चोपड़ा दिल्ली आए और उन्होंने मुझे फिल्म में एक एड ऑफर किया। इसके बाद पहली बार मुझे डायरेक्शन का एहसास हुआ।"
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मैं काफी खुशकिस्मत था कि मैं जब फिल्मों में आया दर्शक काफी दयालु थे और मीडिया भी काफी विनम्र थी। मेरी हिंदी में अमेरिकन लहजा था लेकिन फिर भी उन्होंने मुझे अपनाया। मैं तब से अपने काम से बहुत प्यार करता हूं। सैफ अली खान ने कहा कि "अब हम ऐसे समय में रहते हैं जहां हम अधिक डर में रहते हैं कि बातों का क्या मतलब निकाला जाएगा। मैं इससे काफी असहज होता हूं।" आपको बता दें कि सैफ अली खान अभी 4 फिल्में कर रहे हैं और जल्द ही वो शेफ में दर्शकों के सामने होंगे।


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