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बस घुटने ज़्यादा पहले से ज़्यादा दर्द करते हैं....

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बस घुटने ज़्यादा पहले से ज़्यादा दर्द करते हैं....

अपने सैतींसवें जन्मदिन के मौके पर अभिनेता ऋतिक रोशन.

दस जनवरी को अपना सैंतीसवां जन्मदिन मनाने वाले अभिनेता ऋतिक रोशन आज भी ख़ुद को अट्ठारह साल का महसूस करते हैं.

ऋतिक कहते हैं, “जन्मदिन सिर्फ़ एक तारीख़ है. आप उतने ही जवान होते हैं जितना आप दिल से महसूस करते हैं. मैं आज भी दिल और दिमाग़ से वैसा ही महसूस करता हूं जैसा मैं अट्ठारह साल की उम्र में महसूस करता हूं. बस अब मेरे घुटने ज़्यादा दर्द करते हैं.”

ये बात ऋतिक ने मीडिया से बातचीत में कही.

इस मौके पर ऋतिक रोशन ने लंदन के प्रसिद्ध मैडम टुसॉड्स म्यूज़ियम में अपना मोम का पुतला लगने पर भी ख़ुशी ज़ाहिर की.

उन्होंने कहा, “मैडम टुसॉड्स में मेरा पुतला लग रहा है, ये बहुत अद्भभुत भावना है. मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि ज़िंदगी में कभी अपना पुतला ‘अनवेल’ करुंगा. मुझे याद है कि बारह साल की उम्र में मैं अपने पसंदीदा लोगों के पुतले देखने के लिए मैडम टुसॉड्स के बाहर तीन घंटे तक लाइन में खड़ा रहा था.”

ऋतिक ने आगे कहा, “एक तरह से ये मेरे अब तक के सफ़र का प्रतीकात्मक है. जब मैं थक कर बैठने या रुकने के बारे में सोचूंगा तो ये पुतला प्रेरित करेगा कि मैं रुक नहीं सकता, मुझे चलते जाना है.”

इससे पहले अमिताभ बच्चन, शाहरुख़ ख़ान, ऐश्वर्या राय बच्चन और सलमान ख़ान के मोम के पुतले इस म्यूज़ियम में लग चुके हैं.

फ़िल्मों के लिहाज़ से 2010 ऋतिक रोशन के लिए अच्छा नहीं रहा. उनकी दो ही फ़िल्में—'काइट्स' और 'गुज़ारिश'---रीलीज़ हुईं और दोंनो ही बॉक्स ऑफ़िस पर कुछ ख़ास नहीं कर पाई.

लेकिन इसके बावजूद हाल ही में हुए एक ऑनलाइन सर्वे के अनुसार ऋतिक रोशन को भारत का सबसे ‘मोस्ट डिज़ाइरेबल’ पुरुष चुना गया.

इस बारे में उनका कहना था, “बहुत अच्छा लग रहा है, ख़ासकर क्योंकि इस साल मेरी दो बहुत महत्वपूर्ण फ़िल्में बहुत ज़्यादा नहीं चलीं. लेकिन इसके बावजूद अच्छा लगता है कि लोग मुझे पसंद करते हैं, चाहते हैं.”

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