बिना बॉलीवुड गुलाल के फीका है होली का रंग...
बिना रंग और भंग के तो होली होती ही नहीं, और जब अबीर-गुलाल में फिल्मी गानों का रस घुल जाये तो कहने ही क्या फिर तो जो महफिल जमती है उस बयां कर पाना बेहद मुश्किल है। लाल-पीले-हरे-गुलाबी चेहरे जब पूरी तरह रंगो में रंगे हुए फिल्मी थाप पर नाचते हैं तो मजा दोगुना हो जाता है। लेकिन क्या आपने गौर किया है कि आज भी होली पर कुछ सधे हुए पुराने गीत ही बजते हैं ।
चाहें बूढ़े हों या नौजवान सभी उस धुन पर नाचते हैं। आईये याद करते है होली के अवसर पर उन गानों को। होली के गीतों में पहला गाना फिल्म नवरंग का ..जा रे हट नटखट...याद आता है जिसमें अभिनेत्री संध्या पर्दे पर नायक और नायिका दोनों का किरदार निभाती है। होली के गीतों में लीजेंड ऑफ हिंदी सिनेमा मदर इंडिया का गाना 'होली आई रे कन्हाई रंग.. भी सर्वोपरी अंको वाला है क्योंकि इसके गाने की धुन और बोल आज भी लोगों को काफी अच्छे लगते हैं।
वाकई होली मुहब्बत का त्योहार है...
इसके बाद नंबर आता है बॉलीवुड के ट्रेजिडी किंग दिलीप कुमार का गाना जो कि फिल्म कोहिनूर से है जिसमें एक प्रेमी अपनी प्रेमिका मीनाकुमारी से कहता है कि ..तन रंग लो जी आज मन रंग लो।
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