हिट मतलब 100 करोड़!
3 दिन में 100 करोड़! 1 हफ्ते में 200 करोड़! वर्ल्डवाइड कलेक्शन 300-400 करोड़! इस तरह के वाक्य आप आए दिन लोगों से सुनते रहते होंगे, खासकर वे जिन्हें मूवीज देखने में खासी दिलचस्पी है। बाॅलीवुड भी अब किसी से पीछे नहीं है। आज हर हफ्ते रिलीज होने वाली फिल्मों के हिट होने का पैमाना इस बात से लगाया जाता है कि वह फिल्म कितनी जल्दी 100 करोड़ी क्लब में शामिल होती है।

आज भारत में साल भर में तकरीबन 1000 से ज्यादा फिल्में बनती हैं। एक दौर था जब साल में केवल 8 से 10 फिल्में ही रिलीज होती थीं। उस वक्त फिल्में केवल महानगरों में ही पहले रिलीज होती थीं जैसे मुंबर्इ, दिल्ली, कलकत्ता, चेन्नर्इ आदि। इसके बाद यह फिल्में उससे छोटे शहरों में आती थीं और फिर उससे छोटे और यही सिलसिला चलता था। तब के समय में मूवीज देखने का एक अलग क्रेज हुआ करता था। लोग इंतजार करते थे कि फिल्म बड़े पर्दे पर जल्दी से हमारे शहर में रिलीज हो और देखने के लिए जाएं।
अब Multiplex और सिनेमाघर तय करेंगे कौन सी फिल्म देखनी है कौन नहीं!
अब जमाना मल्टीप्लेक्स का हो गया है। सिंगल स्क्रीन्स के साथ साथ मल्टीप्लेक्सेस में भी लोगों की भारी भीड़ होती है। आज बड़े सितारों की फिल्में तकरीबन 4500 से 5000 स्क्रीन्स पर एक साथ रिलीज की जा रहीं हैं। फिल्मों से संबंधित जानकारी आजकल वायरल की तरह इंटरनेट पर फैल जाती हैं। फिल्म जगत की दुनिया एक तरह से व्यवसाय के रुप में परिवर्तित हो चुकी है।
आज फिल्में रिलीज होने से पहले ही म्यूजिक राइटस और सैटेलाइट राइटस बेंचकर करोंड़ों का मुनाफा कमा लेती हैं। वहीं आज अगर फिल्में चलती हैं तो उसका एक कारण यह भी है कि आपने फिल्म को कितनी अच्छी तरह से लोगों के बीच बेंचा है। आज मार्केटिंग और प्रमोशन के बिना फिल्मों को हिट कराना मुश्िकल सा हो गया है।
हर न्यूज चैनल्स, टीवी सीरियल्स, सोशल साइटस पर बड़े पैमाने पर फिल्मों का प्रमोशन होता है। इस मामले में हमारी हिंदी फिल्म इंडस्टी के तीनों खान-शाहरुख, सलमान और आमिर अन्य की अपेक्षा काफी आगे हैं। ये लोग फिल्म प्रमोशन करने के हमेशा नए नए तरीके इजात करते रहते हैं। यही कारण है कि इनकी फिल्में बाक्स आफिस पर हमेशा धूम मचाती हैं।
लेकिन जनता भी धीरे धीरे इससे उब रही है। आज फिल्मों को हिट की श्रेणी में तभी रखा जाता है जब वह 100 करोड़ की कमार्इ कर ले। खैर, परिवर्तन हमेशा से ही समय की मांग रही है इसलिए निर्माताओं, निर्देशकों और साथ ही साथ फिल्मी सितारों को भी चाहिए कि वे एक ही तरह की फिल्मों को करने के बजाए कुछ अलग करने का प्रयास करेंं। फिल्मों की गुणवत्ता को बनाएं रखें वरना जनता का मूड बदलते देर नहीं क्योंकि-'ये पब्िलक है, सब जानती है ये पब्िलक है!


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