हिंदी दिवस: यदि मैं हिंदी जानता हूं तो यह मेरी कमज़ोरी नहीं, यह मेरी ताकत है- मनोज बाजपेयी

बॉलीवुड में लगभग 25 साल गुज़ार चुके अभिनेता मनोज बाजपेयी को आज उनके किरदारों, उनकी फिल्मों की वजह से जाना जाता है। सत्या हो या शूल या अलीगढ़.. अभिनेता ने अपने दमदार किरदारों से इंडस्ट्री में अपनी एक खास जगह बनाई है। अपनी फिल्मों के साथ साथ मनोज बाजपेयी हिंदी भाषा पर अपनी मजबूत पकड़ को लेकर भी जाने जाते हैं।

हिंदी दिवस के मौके पर अभिनेता मनोज बाजपेयी ने हिंदी भाषा को अपनी ताकत बताई। उन्होंने कहा, मैं हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में काम कर रहा हूं, यदि मैं हिंदी बोलना पढ़ना लिखना जानता हूं तो यह मेरी कमज़ोरी नहीं, यह मेरी ताकत है। जिसको नहीं आती है, वो अपना सोचे। मुझे फिल्म की स्क्रिुप्ट भी देवनागरी में ही दी जाती है। रोमन में कोई देने की हिम्मत नहीं करता क्योंकि उन्हें पता है कि ऐसा हुआ तो मैं स्क्रिप्ट फेंक दूंगा।

Manoj Bajpayee

मनोज बाजपेयी ने कहा, मेरी मातृभाषा भोजपुरी रही है, लेकिन हिंदी मैंने सीखी है। हिंदी मुझे बहुत ही मधुर भाषा लगती है। मैंने कई हिंदी विद्वानों को पढ़ा है। खासकर रंगमंच करने के लिए यह आवश्यक है कि हिंदी और उर्दू में आपकी पकड़ अच्छी होनी चाहिए। जो भी भाषा सीखी मैंने, वो रंगमंच के कारण सीखी।

कविताएं आज भी पढ़ता हूं मैं, मुझे बहुत अच्छा लगता है। लिखने का समय नहीं मिलता लेकिन मैंने हर दिन किताब पढ़ने का नियम बना रखा है।

साथ ही मनोज बाजपेयी ने साझा किया कि उनकी बेटी को हिंदी नहीं आती। उन्होंने कहा, मैं पूरी कोशिश करता हूं कि उससे हमेशा हिंदी में बात किया करूं। शायद इसीलिए वो मुझे पिछड़ा हुआ भी समझती है। लेकिन मुंबई जैसे शहर में बच्चों को हिंदी सिखाना एक चुनौती है। यहां स्कूल में अध्यापक, उसके मित्र, घर के पास के मित्र और उनके मां-बाप सभी अंग्रेजी में बात करते हैं। ऐसे में सिर्फ मैं ही हूं जो उससे हिंदी में बात करता हूं। कोशिश जारी है।

More from Filmibeat

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+
X