हाई कोर्ट ने दिया सुभाष घई को झटका

कार्यवाहक चीफ जस्टिस जसबीर सिंह व जस्टिस राकेश कुमार जैन की खंडपीठ ने भूमि की बिक्री को खारिज किया। साथ ही ग्राम पंचायत को कब्जा लेकर भूमि की कीमत ब्याज सहित लौटाने के निर्देश दिए। कुल कीमत 8 करोड़ रुपए का भुगतान 20 किस्तों में घई ने करना था, जिसमें से 7 किस्तों का भुगतान हो चुका है। बाडसा के नफे सिंह ने जनहित याचिका में कहा था कि सरकार ने नियमों को ताक पर रख पंचायत की भूमि सुभाष घई की निजी कंपनी को देने की अनुमति दे दी।
ग्राम पंचायत के सरपंच रणवीर सिंह से मंगलवार को अदालत ने पूछा कि भूमि क्यों बेची गई? तो जवाब मिला कि इससे ग्रामीणों को नौकरी का मौका मिलेगा। इस पर खंडपीठ ने कहा कि यह कोई शिक्षण संस्थान नहीं है। फिल्मों में ग्रामीणों को कैसे काम मिलेगा? इससे पहले सुभाष घई ने हरियाणा के कितने लोगों को अपनी फिल्मों में मौके दिए हैं?
यदि खुले बाजार में भूमि को बेचा जाता तो इससे 20 गुणा कीमत मिलती। मोहाली में दारा स्टूडियो को रियायती दामों पर भूमि दी गई, लेकिन अब वह मैरिज पैलेस बन गया है। इसके अलावा कृषि भूमि ही क्यों दी गई? बंजर भूमि भी दी जा सकती थी। खंडपीठ ने ऐसे ही कई सवाल पूछे, लेकिन सरपंच के पास इनका कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।


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