FIRST REVIEW: हिचकी, रानी मुखर्जी पास हो गईं लेकिन नकल कर के!
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खाड़ी देशों में फिल्म रिलीज़ हो चुकी है और क्रिटिक्स ने रानी मुखर्जी के कमबैक को पास कर दिया है। लेकिन उन्हें कितने नंबर मिले हैं, ये तो आपको उनकी समीक्षा के बाद ही पता चलेगा।
इसलिए भारत में रिलीज़ होने से पहले, हम हिचकी के बारे में खाड़ी देशों के क्रिटिक्स की समीक्षा लेकर आए हैं जिन्होंने रानी की फिल्म में कमियां तो बताई फिर भी गल्फ न्यूज़ और खलीज टाइम्स ने इसे 3 स्टार दिए हैं।

फिल्म एक हॉलीवुड फिल्म से प्रेरित है ये तो सबको पता है और इस नकल से रानी मुखर्जी पास हुई या नहीं ये खाड़ी देशों ने पहले ही बता दिया है।
रानी फिल्म में नैना माथुर की भूमिका में दिखाई देती हैं जिसे स्पीच डिफेक्ट यानि बोलने में थोड़ी सी दिक्कत होती है। इसलिए रानी को टीचर की नौकरी मिलने में भी दिक्कत होती है। आखिरकार उन्हें नौकरी मिलती है और उन्हें 14 बस्ती के बच्चों को पढ़ाने की ज़िम्मेदारी दे दी जाती है। रानी इन 14 बच्चों की ज़िंदगी कैसे बदलेंगी यही फिल्म की कहानी है।
अब रानी को जो नौकरी मिली है उसी से साफ है कि उनकी मुश्किल बढ़ा दी गई है। बच्चे उन पर सट्टा खेलते हैं कि ये हकली, कितने दिन टिकेगी। इन बच्चों की ज़िंदगी से भी परिचय करवाया जाता है। बच्चे ही फिल्म का मुख्य किरदार हैं लेकिन उनकी कहानी से आपका दिल नहीं पिघलेगा। यही शायद फिल्म का सबसे कमज़ोर पक्ष है।
फिल्म में कुछ नया नहीं है। आप हर कदम पर भांप सकते हैं कि आगे क्या होने वाला है। फिल्म कुछ गरीब बच्चों की कहानी है जो ज़िंदगी में कुछ करना नहीं जानते हैं। उनकी ज़िंदगी बदलती है एक टीचर। शायद फिल्म पन्नों पर ज़्यादा अच्छी लगे लेकिन सिद्धार्थ मल्होत्रा उसे स्क्रीन पर नहीं उतार पाए हैं।
फिल्म की तुलना आप तारे ज़मीन से किए बिना नहीं रह पाएंगे। वहां भी डाईस्लेक्सिया से पीड़ित एक बच्चे की कहानी थी जिसका सपोर्ट उसका टीचर बनता है। वहां भी कहानी अनोखी नहीं थी लेकिन डायरेक्शन ने फिल्म की कायापलट कर दी थी।
ये फिल्म केवल रानी मुखर्जी के लिए देखिए। वो आपको बिल्कुल भी निराश नहीं करेंगी। सिनेमा हॉल छोड़ते हुए आप ये सोचेंगे ज़रूर कि क्या ये रानी मुखर्जी के लिए बेस्ट कमबैक फिल्म थी?


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